लखनऊ। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में 25 दिन से हेपेटाइटिस वायरल लोड की जांच पूरी तरह बंद है। जांच किट खत्म होने और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) से बजट न मिलने के कारण यह स्थिति बनी है।
इसका सीधा असर उन मरीजों पर पड़ रहा है, जिनके इलाज की निगरानी इसी जांच पर निर्भर करती है। मजबूरी में मरीजों को अब निजी लैब में महंगी जांच करवानी पड़ रही है, जहां एक जांच के लिए कई हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। केजीएमयू में हर दिन करीब 40 से 50 मरीजों को हेपेटाइटिस वायरल लोड जांच लिखी जाती है। चूंकि संस्थान प्रदेश का नोडल सेंटर भी है, इसलिए कई जिलों से भी मरीजों के सैंपल यहां जांच के लिए भेजे जाते हैं। सामान्य दिनों में लैब में प्रतिदिन 70 से 90 सैंपलों की जांच होती थी, लेकिन अब जांच ठप है। ओपीडी से सैंपल लेना भी बंद कर दिया गया है। विभागों को भी नए सैंपल न भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
इससे दूरदराज के जिलों से आने वाले मरीजों की परेशानी और बढ़ गई है। कई मरीज जांच के लिए बार-बार लखनऊ आ रहे हैं, लेकिन सैंपल जमा नहीं हो पा रहे। इससे समय और पैसे दोनों का नुकसान हो रहा है।