एक तरफ ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी के विकास कार्य हैं तो दूसरी तरफ अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी।
हेमा के आने से मुकाबला रोचक हो गया है। पढ़ें क्या है मथुरा की स्थिति। प्रदूषित कालिंदी अपने कान्हा को पुकार रही है। प्राचीन मंदिरों के स्वर्णिम अतीत पर उपेक्षा की धूल है।
वीआईपी रोज आकर बिहारीजी की जय-जयकार करते हैं, लेकिन यहां के वन, उपवन, यमुना, प्राचीन मंदिरों के उद्धार की जरूरत महसूस नहीं करते।
ये हालात तब हैं जबकि हर साल यहां दस करोड़ से अधिक श्रद्धालु श्रीकृष्ण और राधारानी का आशीर्वाद लेने आते हैं।
बदहाल सड़कों से चौपट हुआ कारोबार
मथुरा जंक्शन पहुंचते ही श्रद्धालु बदइंतजामी से मुकाबिल होते हैं। यहां से जन्मभूमि जाने वाली सड़क दस बरस से टूटी हुई है।
बेहिसाब उड़ती धूल से दुकानदारों का कारोबार चौपट है। इसी रोड पर अपनी जेनरेटर पार्ट्स की दुकान से धूल साफ करते भूषण कुमार आहूजा सड़क की बात पर जनप्रतिनिधियों पर भड़क उठते हैं।
कहते हैं, कारोबार 40 फीसदी गिर गया है। अरसे बाद सड़क बनती है तो सीवर लाइन के लिए गड्ढा खोद दिया जाता है। ऐसा तकरीबन दस साल से चल रहा है।
गन्ने की खेती हो गयी है चौपट
जिला मुख्यालय से 32 किमी दूर छाता शुगर मिल को लेकर आंदोलन होते रहते हैं। 2008 में मिल बंद होने के समय तीन सौ कर्मचारियों को वीआरएस लेने पर मजबूर होना पड़ा।
मिल बंद होते ही गन्ने की खेती भी चौपट हो गई। मिल बंदी का दर्द शहर के हनुमान टीले पर रहने वाले श्यामसुंदर शर्मा की आंखों में है।
कहते हैं, बहुत दिन घर बैठा रहा अब इधर-उधर प्राइवेट काम कर लेता हूं। वृंदावन में रह रहे राजेंद्र प्रसाद सारस्वत कहते हैं, होनी को यही लिखा था।
बना यमुना एक्सप्रेस वे
हर घड़ी विकास की बाट जोहती कृष्ण की नगरी एक बार फिर नई उम्मीदों के साथ चुनाव की प्रतीक्षा में है।
जयंत चौधरी यहां के सांसद हैं, उनकी उपलब्धि यही है कि उन्होंने अपनी निधि का पूरा इस्तेमाल कर लिया।
पांच बरस में यमुना एक्सप्रेसवे का तोहफा मथुरा के लिए खास है लेकिन गोवर्धन तहसील निर्माण और कान्हा के मंदिरों की दुर्दशा पर माननीयों और सरकार की कृपा नहीं हुई।
ऐसा था 2009 का चुनाव परिणाम
जयंत चौधरी, रालोद-379870
श्यामसुंदर शर्मा, बसपा-210257
मानवेंद्र सिंह, कांग्रेस-85418
जयंत चौधरी रालोद-भाजपा गठबंधन के प्रत्याशी थे। उन्हें 52.90 प्रतिशत वोट मिले थे।
जयंत चौधरी का रिपोर्ट कार्ड
170 करोड़ रूपये यमुना कार्ययोजना में खर्च पर पर नतीजा शिफर रहा।
उड्डयन मंत्रालय ने मथुरा में एयरपोर्ट का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा।
भूमि अधिग्रहण कानून संशोधन : संसद में प्राइवेट बिल प्रस्तुत किया, बाद में सरकार ने नया कानून बनाया। हरित प्रदेश का मुद्दा कई बार आया पर कोई पहल नहीं।
क्षेत्र में लोगों को अभी भी खारा पानी पीना पड़ रहा है साथ ही बेरोजगारी भी एक बड़ी समस्या है।
मथुरा को हैं हेमा से उम्मीद
हेमा ने राज्यसभा सदस्य के रूप में यहां विकास कार्य किये हैं जो कि उनका मजबूत पक्ष है।
वह ग्लैमर और अपनी सकारात्मक छवि से वोटरों को लुभा सकती हैं।
रालोद के जाट वोट बैंक में सेंध लगा सकती हैं। स्टारडम के आगे खत्म हो सकती है भाजपा की आंतरिक गुटबाजी।
अजित सिंह के पुत्र हैं जयंत चौधरी
केंद्रीय मंत्री अजित सिंह का पुत्र होने के साथ ही जयंत चौधरी रालोद के राष्ट्रीय महासचिव हैं। पिछली बार भाजपा से गठबंधन था और इस बार उन्हें कांग्रेसी हाथ का साथ मिला है।
तरकश के तीर- जाट आरक्षण के नाम पर वोटरों को साधने की कोशिश। सांसद निधि के पूरे उपयोग को भुनाने की कोशिश।
एयरपोर्ट बनाने की कोशिशों को जनता में प्रचारित करेंगे।
सपा से चुनावी मैदान में हैं चंदन सिंह
पूर्व में विधायक रह चुके ठाकुर चंदन सिंह को पार्टी की गुटबाजी की समस्या लगातार झेलनी पड़ी है। वह पार्टी से पहले निष्कासित भी हो चुके हैं।
सपा सरकार की उपलब्धियों के सहारे नैया पार लगाने की कोशिश।
पहले ही टिकट मिल जाने से वे लंबे समय से मतदाताओं के संपर्क में हैं।
बसपा ने उदयन की जगह योगेश को दिया टिकट
बसपा ने उदयन शर्मा का टिकट काटकर योगेश द्विवेदी को प्रत्याशी बनाया। योगेश के भाई ब्लाक प्रमुख हैं और मां पुष्पा शर्मा वृंदावन की चेयरमैन रह चुकी हैं।
बसपा के परंपरागत वोटों के साथ स्वजातीय वोटों को एकजुट करने की कोशिश।
वृंदावन और मथुरा में सियासी बैकग्राउंड के सहारे मतदाताओं को रिझाने की कोशिश।
बड़ी पार्टियों के छत्रपों को आप से मिलेगी टक्कर
अनुज गर्ग मथुरा से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार हैं, वह दिल्ली में पार्टी के ऐतिहासिक प्रदर्शन में शानदार भूमिका निभा चुके हैं।
युवाओं के सहारे ब्रज विरासत और यमुना मुद्दे के दम पर मतदाताओं से सीधा संवाद कर रहे हैं।
‘आप’ की छवि के सहारे युवा मतदाताओं पर भरोसा। सामाजिक क्षेत्र में किए गए कार्यों के सहारे जनता को रिझाने की कोशिश।
जयंत को है जीत का विश्वास
पिछले चुनाव में व्यवस्था परिवर्तन का नारा दिया गया था।
कई कोशिशें सार्थक रही हैं। विकास कार्यों में पारदर्शिता देखने को मिली है।
अब कोशिश यहां एयरपोर्ट की स्थापना, गंगा की भांति यमुना प्राधिकरण का गठन