बगैर सीने पर चीरा लगाए ही एसजीपीजीआई के कार्डियोलॉजिस्ट की टीम ने खराब दिल का वॉल्व बदल दिया। यह सब संभव हुआ ट्रांस एरोटिक वॉल्व इम्प्लांट तकनीक की मदद से। सबसे खास बात है कि महज एक घंटे में ही वॉल्व को बदल दिया गया।
प्रदेश में इस तकनीकी का इस्तेमाल करने वाला एसजीपीजीआई पहला संस्थान है। आपरेशन करने वाले कार्डियोलॉजिस्ट डॉ.पीके गोयल ने बताया कि सीने में दर्द की शिकायत के साथ 76 वर्षीय मरीज एसजीपीजीआई पहुंचा तो जांच में पाया गया कि उसके दिल का एयरोटिक वॉल्व काम नहीं कर रहा है।
चिकित्सकीय भाषा में उसकी बीमारी की बात करें तो एयरोटिक स्टोनोसिस से पीड़ित था। यही नहीं फेफड़े और गुर्दे की समस्या से भी वह जूझ रहा था। प्रो.पीके गोयल ने बताया कि जो वॉल्व मरीज का बदला गया है।
उसकी भारत में बिक्री नहीं है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की ओर से इस वॉल्व को भारत में बिक्री की अनुमति नहीं है। इस मामले में मरीज का वॉल्व विदेश से मंगाया गया था जिसकी कीमत करीब 13 लाख रुपये है।