आपकी हथेली में समा जाने वाला स्मार्ट फोन अब हार्ट अटैक के मरीजों को बचाने के काम भी आएगा।
फोन के स्मार्ट एप्स का इस्तेमाल कर ग्रामीण मरीजों की जान बचाई जा सकेगी।
सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों या फिर ऐसे जनपदों में जहां हृदय रोगियों के इलाज की पूर्ण सुविधा नहीं है स्मार्ट फोन मरीज की गंभीर स्थिति को पहचानने में मदद करेगा।
फोन से मरीज की ईसीजी रिपोर्ट हृदय रोग विशेषज्ञ को भेजी जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक उसे जरूरी जीवन रक्षक दवाएं देने के संबंध में फौरन निर्देश देगा। दवा देने के बाद मरीज को मेडिकल सेंटर पर इलाज के लिए भेज दिया जाएगा।
संजय गांधी पीजीआई के पूर्व छात्र और कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल्स के चीफ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. ए. श्रीनिवास कुमार की इस सलाह को रविवार को जमकर सराहना मिली।
यही नहीं यूपी सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ने उनकी इस योजना में रुचि दिखायी और छुट्टी होने के बावजूद रविवार को अपने ऑफिस आने का न्यौता भी दिया।
एसजीपीजीआई के स्थापना दिवस समारोह में आए डॉ. श्रीनिवास कुमार ने बताया कि मोबाइल फोन के इस्तेमाल से हृदय रोगी की जान बचाना बहुत आसान है।
जरूरत है कि स्वास्थ्य केंद्र पर ईसीजी मशीन, हार्ट अटैक होने के बाद दी जाने वाली जीवन रक्षक दवा, ईसीजी टेक्नीशियन और डॉक्टर के पास स्मार्ट फोन हो।
इसके साथ ही नेटवर्क में शामिल हृदय रोग विशेषज्ञों के नंबर हों, जिस पर तत्काल ईसीजी रिपोर्ट भेजी जा सके। उन्होंने बताया कि ईसीजी रिपोर्ट देखकर ही विशेषज्ञ चिकित्सक मरीज को हार्ट अटैक की गंभीरता का आंकलन करेगा।
इसके बाद मरीज की स्थिति के हिसाब से खून के थक्कों को गलाने वाली दवा देने की सलाह देकर पहले उसकी जान बचाई जाएगी।
ये प्रक्रिया यदि एक घंटे के अंदर हो जाए तो मरीज को बचाने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। यदि दवा देने के बाद छह घंटे के अंदर उसे ऐसे संस्थान पहुंचाने की जरूरत होती है जहां मरीज की एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी या जरूरत के अनुसार इलाज मुहैया कराया जा सके।
डॉ. श्रीनिवास कुमार ने बताया कि ‘टेनेक्टेप्लेस’ नाम की दवा ऐसे मरीजों को इंजेक्शन के द्वारा दी जाती है। स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर के साथ ही इस दवा का होना भी बहुत जरूरी है तभी मरीज को बचाया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि यूपी सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इस प्रोजेक्ट में रुचि दिखायी है।
उन्होंने कहा कि ये सुविधा यूपी जैसे प्रदेश के लिए बहुत ही लाभदायक है। जहां हर जगह हृदय रोग के समुचित इलाज की व्यवस्था नहीं है। इस प्रोजेक्ट में ज्यादा खर्च भी नहीं आना है।