कुल जन्म लेने वाले बच्चों में 1 से 2 फीसदी में पैदाइशी रोग होने की आशंका होती है। अगर महिला को डायबिटीज है तो ये आशंका बढ़कर 8 से 10 फीसदी हो जाती है।
डायबिटीज को नियंत्रित करने के बाद ही बच्चे को जन्म देने की योजना बनानी चाहिए। वहीं, थायरायड पीड़ित महिलाओं के नवजात मानसिक मंदित हो सकते हैं।
यूपी ऑब्सटेट्रिक्स एडं गायनकोलॉजिस्ट एसोसिएशन के 25वें वार्षिक सम्मेलन यूपीकॉन-2013 के दूसरे दिन शनिवार को केजीएमयू की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. पुष्पलता शंखवार ने ये जानकारी दी।
डॉ.शंखवार ने कहा कि अगर आपको बच्चा सेहतमंद चाहिए तो जरूरी हो जाता है कि मां की सेहत का भी ध्यान रखा जाए,क्योंकि मां का खराब स्वास्थ्य बच्चे की सेहत और जिंदगी दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है।
अनियंत्रित थायरायड, डायबिटीज, खून की कमी यदि किसी महिला को है तो उसे स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के संपर्क में रहना चाहिए, जिससे गर्भधारण करने से पहले ही उसे सुरक्षित प्रसव के लिए तैयार किया जा सके।
इससे बच्चे की मानसिक, शारीरिक सेहत अच्छी रहेगी। यदि गर्भवती होने के बाद महिला चिकित्सक के पास पहुंचती है तो प्रसव होने तक उसकी देखभाल बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है।
खासतौर से बच्चे के जन्म होने का समय नजदीक आने पर दोनों की सेहत पर नजर रखना बहुत जरूरी हो जाता है। थायरायड नियंत्रित न होने से शिशु मानसिक मंदित हो सकता है।
शारीरिक विकास में गड़बड़ी के साथ ही बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइसेंस की सदस्य डॉ. साधना गुप्ता ने बताया कि देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में मातृत्व मृत्यु दर में कमी न आना चिंताजनक विषय है।
यहां अब भी 25 से 30 प्रतिशत प्रसव घरों पर पुराने तरीके से किए जा रहे हैं। देश की एक लाख गर्भवती महिलाओं में 212 महिलाओं की मौत हो रही है।
वहीं प्रदेश में यह आंकड़ा 380 के करीब है। यह मौतें सबसे ज्यादा प्रसव के दौरान रक्तस्राव के कारण होती हैं। अधिकतर महिलाओं की मौत प्रसव के दो घंटे के अंदर हो जाती है।
गर्भधारण से पहले मधुमेह जांच जरूरी
गर्भधारण से पहले महिलाओं को मधुमेह की जांच कराना जरूरी है। यदि महिला का वजन ज्यादा है तो ये और भी जरूरी हो जाता है। फेडरेशन ऑफ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनकोलॉजिस्ट की अध्यक्ष डॉ. हेमा दिवाकर ने बताया कि महिलाओं को मां बनने से पहले 75 ग्राम ग्लूकोज का सेवन कर दो घंटे बाद जांच कराना चाहिए।
जांच में यदि ग्लूकोज 140 ग्राम से ज्यादा आए तो उस महिला को मधुमेह नियंत्रित करने के बाद ही गर्भधारण की योजना बनानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान सुगर बढ़ने से शिशु के भी डायबिटिक होने की संभावना बढ़ जाती है।
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