लखनऊ। पत्तेदार हरी सब्जियां उगाने वाले किसानों के लिए राहत भरी खबर है। अब प्रदूषित मिट्टी और पानी में भी हरी व पत्तेदार सब्जियां न केवल उगाई जा सकेंगी, बल्कि उनके पत्ते भी स्वस्थ और सुरक्षित रहेंगे। लखनऊ विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग ने सिल्वर क्वांटम डॉट्स आधारित एक नई तकनीक विकसित की है, जो आर्सेनिक जैसे जहरीले तत्वों से फसलों को बचाने में कारगर साबित हो रही है।
विभाग के अनुसार देश के हजारों किसान ऐसी जमीन पर खेती करने को मजबूर हैं, जहां मिट्टी और भूजल में आर्सेनिक की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है। पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, असम और पंजाब जैसे राज्यों में यह समस्या गंभीर बनी हुई है। ऐसे में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण सब्जियों का उत्पादन किसानों के लिए लगातार चुनौती बनता जा रहा है।
इस चुनौती से निपटने के लिए वनस्पति विज्ञान विभाग में प्रो. मोहम्मद इसराइल अंसारी के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम ने पर्यावरण के अनुकूल तकनीक विकसित की है। इस तकनीक में पौधों से तैयार किए गए सिल्वर क्वांटम डॉट्स का उपयोग किया गया है। ये अत्यंत सूक्ष्म कण पौधों के भीतर सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं और आर्सेनिक को जड़ों से पत्तियों तक पहुंचने से काफी हद तक रोक देते हैं।
शोध के दौरान इन क्वांटम डॉट्स को पालक की पत्तियों से ही हरित प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया गया। जब इन्हें आर्सेनिक से दूषित मिट्टी में प्रयोग किया गया, तो पौधों की कोशिकाओं के भीतर जाकर इन्होंने जहरीले तत्वों के प्रभाव को कम कर दिया। परिणामस्वरूप पालक की पत्तियां अधिक हरी, स्वस्थ और पोषक बनी रहीं।
प्रो. अंसारी ने बताया कि यह तकनीक न केवल पौधों की आंतरिक रक्षा प्रणाली को मजबूत करती है, बल्कि प्रदूषित वातावरण में भी उनकी वृद्धि और पैदावार को बेहतर बनाती है। आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्रों में खेती के लिए यह शोध किसानों के लिए नई उम्मीद साबित हो सकता है।