रायबरेली रोड निवासी 45 वर्षीय अधेड़ चार दिन पहले पॉजिटिव हुए। शुगर की बीमारी होने से डॉक्टरों ने भर्ती होने की सलाह दी।
पर मरीज ने शपथ पत्र देकर होम आइसोलेशन चुना। दो दिन बाद मरीज का ऑक्सीजन लेवल गिरने लगा तो आनन फानन उन्हें कोविड आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा।
अलीगंज निवासी 60 बुजुर्ग हफ्तेभर पहले पॉजिटिव हुए। डॉक्टरों के कहने के बावजूद उन्होंने होम आइसोलेशन चुना।
तीसरे दिन ही बुजुर्ग को सांस लेने में तकलीफ होने लगी। ऑक्सीजन लेवल लगातार बिगड़ता जा रहा था। मरीज को लोहिया कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया।
ये मामले यह बताने के लिए काफी हैं कि मरीजों की जरा सी लापरवाही से उनकी जान पर बन आ रही है। होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों की इस बार तीसरे दिन ही सेहत बिगड़ रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, रोजाना 30-35 ऐसे रोगी होम आइसोलेशन चुन रहे हैं जो किसी न किसी बीमारी से पीड़ित हैं। इनमें से कुछ ऐसे भी हैं जो बीमारी को छिपाकर होम आइसोलेशन में जा रहे हैं। यह जानलेवा हो सकता है।
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. केपी त्रिपाठी के मुताबिक, पिछले साल कोरोना वायरस का असर इतना प्रभावी नहीं था। पॉजिटिव आने के सातवें व आठवें दिन मरीजों की सेहत पर अटैक करता था।
लेकिन वायरस का नया म्यूटेंट दूसरे या तीसरे दिन ही मरीजों को चपेट में लेकर अस्पताल पहुंचा रहा है। इसमें अधिकतर मामलाें में मरीजों का ऑक्सीजन लेवल गिर रहा है। वहीं, कई लोग बीमारी छिपाकर भी होम आइसोलेशन में जा रहे हैं।
मार्च में 50 से अधिक भेजे गए अस्पताल
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो मार्च में होम आइसोलेशन समाप्त करके 50 से अधिक लोगों को अस्पताल भेजना पड़ा। जहां इलाज के दौरान हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया।