राजधानी में एक ढाई साल की बच्ची को ब्रेन स्ट्रोक होने का दुर्लभ मामला सामने आया है। कानपुर रोड स्थित निजी अस्पताल में आए इस मामले में डॉक्टरों ने कठिन न्यूरो इंटरवेंशनल प्रक्रिया करके उसकी जान बचाई है।
इंटरवेंशनल न्यूरो-रेडियोलॉजिस्ट डॉ. देवांश मिश्रा ने बताया कि बच्ची को अचानक बेहोशी, हाथ-पैरों में लकवा और बार-बार बेहोश होने की गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया था। आपातकालीन जांच में मस्तिष्क की गहरी शिरा में खून का थक्का (सेरेब्रल वेनस थ्रोम्बोसिस) पाया गया। बच्ची की जान बचाने के लिए इंट्राक्रेनियल कैथेटर डायरेक्टेड थ्रोम्बोलाइसिस नामक उन्नत प्रक्रिया करने का फैसला किया गया। डॉ. मिश्रा ने बताया कि बच्ची एपीएलए सिंड्रोम से ग्रसित थी और समय पर हस्तक्षेप न होता तो उसे बचाना संभव नहीं था। इस प्रक्रिया के दौरान, पैर में एक छोटा छेद कर सूक्ष्म कैथेटर को रक्त वाहिकाओं के माध्यम से मस्तिष्क की प्रभावित शिरा तक सावधानीपूर्वक पहुंचाया गया। इसके बाद थक्का घोलने वाली दवा सीधे उसी स्थान पर दी गई। चार दिनों की लगातार निगरानी के बाद थक्का पूरी तरह घुल गया। लगभग तीन सप्ताह के उपचार के बाद बच्ची को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और अब वह सामान्य दैनिक गतिविधियां करने में सक्षम है। इस मामले को 12 से 15 मार्च तक कोच्चि में आयोजित होने जा रही इंडियन नेशनल स्ट्रोक कॉन्फ्रेंस 2026 में प्रस्तुत किया जाएगा।