डेंगू फैलने की बात पर सूबे के स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन इस कदर भड़के कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के डॉक्टरों को दलाल तक कह डाला।
पत्रकारों ने जब उन्हें बताया कि आईएमए के ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स के लिए रोज मारामारी हो रही है, तो स्वास्थ्यमंत्री ने कहा कि आईएमए के डॉक्टर दलाल हैं।
बुखार का हर पीड़ित डेंगू का मरीज नहीं हो जाता। वाराणसी में मंगलवार को उन्होंने कहा कि कुछ लोग डेंगू के बारे में अफवाह फैलाकर माहौल खराब करने में लगे हैं।
डेंगू का एक ही संदिग्ध मरीज लखनऊ में मिला था। उसमें भी बीमारी की पुष्टि नहीं हुई। आईएमए के यूपी अध्यक्ष डॉ. रवि मेहरा ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री चिकित्सकों के संरक्षक हैं।
बयान उनकी भूमिका पर भी सवालिया निशान लगाने वाला है क्योंकि डॉक्टरों के मुखिया तो वही हैं। उन्हें साफ करना चाहिए कि आईएमए के डॉक्टर आखिर किसकी दलाली कर रहे हैं?
दो और मेडिकोज को डेंगू की शिकायत
केजीएमयू में बुखार से पीड़ित दो रेजिडेंट डॉक्टरों में डेंगू की शिकायत पाई गई है। दोनों रेजिडेंट को विभाग में ही भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
वहीं गांधी वार्ड में कई मरीजों को डेंगू की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया है। वहीं डेंगू से पीड़ित पांच रेजिडेंट डॉक्टरों का इलाज गांधी वार्ड और ट्रॉमा सेंटर में पहले से ही चल रहा है।
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के रेजिडेंट डॉक्टर लगातार डेंगू की चपेट में आ रहे हैं। मंगलवार को बुखार से पीड़ित न्यूरो सर्जरी विभाग के एक रेजिडेंट डॉक्टर की खून की जांच कराई गई तो उसमें डेंगू पाया गया।
इसके बाद रेजिडेंट को न्यूरो सर्जरी के रेजिडेंट रूम में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया है। इसी तरह डेंटल साइंस के पेडोडॉटिक्स विभाग के एक रेजिडेंट को डेंगू की शिकायत के बाद इलाज के लिए भर्ती किया गया है।
हालांकि अभी दोनों रेजिडेंट डॉक्टरों का मैक एलाइजा टेस्ट नहीं हुआ है। वहीं दूसरी ओर केजीएमयू के बुद्धा हॉस्टल के पांच छात्र डेंगू से पीड़ित हैं जिनका इलाज मंगलवार को भी गांधी वार्ड समेत अन्य विभागों में जारी रहा।
केजीएमयू में बाहरी गंदगी पड़ रही भारी
केजीएमयू परिसर के आसपास के इलाकों में गंदगी से मच्छरजनित बीमारी फैल रही है। कुलपति प्रो. रविकांत ने मंगलवार को केजीएमयू परिसर के आसपास के इलाकों में बिखरी गंदगी की फोटो और पूरा विवरण फोटो सहित पत्र नगर आयुक्त और नगर स्वास्थ्य अधिकारी को भेजा।
पत्र में बताया गया है कि आइस फैक्ट्री में जमा पानी और आसपास के इलाकों में गंदा ड्रेनेज सिस्टम मेडिकोज और मरीजों पर भारी पड़ रहा है।
अधिकारियों से अपील की गई है कि मेडिकोज और मरीजों के हित को देखते हुए विशेष साफ सफाई अभियान चलाया जाए। केजीएमयू से मिली जानकारी के मुताबिक डेंगू से पीड़ित सभी छात्रों की हालत पहले से बेहतर है और उन्हें एक दो दिन में डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।