लखनऊ। लखीमपुर खीरी की आशा कार्यकर्ता की मौत मामले में स्वास्थ्य विभाग की कमेटी ने जांच पूरी कर ली है। कमेटी ने डॉक्टर को दोषी माना है और अब वह एनएमसी को पत्र भेजकर डॉक्टर की प्रैक्टिस छह माह के लिए बैन करने की संस्तुति करेगी। इसकी रिपोर्ट मानवाधिकार आयोग व पुलिस को भी भेजने की तैयारी की है। वहीं, केजीएमयू के ईएनटी विभाग ने कमेटी को आरोपित डॉक्टर के बर्खास्त होने का पत्र भेजा है।
लखीमपुर खीरी के महाराज नगर निवासी सुरेंद्र की पत्नी आशा कार्यकर्ता पूनम मौर्य (32) का इलाज केजीएमयू के ईएनटी विभाग में डॉ. रमेश की देखरेख में चल रहा था, मगर प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त डॉ. रमेश ने पूनम को 25 अक्टूबर को केडी अस्पताल में करा दिया था, जहां बेहोशी का इंजेक्शन देने में हुई लापरवाही से पूनम की मौत हो गई थी।
इस पर केजीएमयू प्रशासन ने डॉ. रमेश को बर्खास्त कर दिया था। मामले की जांच के लिए कमेटी गठित हुई थी, मगर डॉक्टर ने अभी तक बयान तक दर्ज नहीं कराया है। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि मानवाधिकार आयोग व पुलिस को रिपोर्ट भेजी जा रही है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।