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कोरोना से बचाव के लिए मंगवा लिए चीनी मास्क, शासन ने लगाई फटकार

Fri, 21 Feb 2020 03:26 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए एन 95 मास्क की जगह चीनी मास्क का ऑर्डर दे दिया था। इसमें सैकड़ों मास्क सीएमओ कार्यालय भेज दिए गए थे। मास्क पर मेड इन चीन लिखा होने पर पूरी खेप को वापस कराया गया। इतना ही नहीं इसके बाद कोरोना वायरस के बजाय प्रदूषण से बचाव वाले एन 95 मास्क खरीद लिए गए।

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इसमें आधे मास्क का वितरण भी कर दिया गया। शासन की फटकार के बाद प्रदूषण रोकने वाले मास्क की आधी खेप को वापस किया गया। आरोप है कि कमीशन के खेल में सस्ते चीनी मास्क की खरीद निजी वेंडर से की गई थी।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिस फर्म से मास्क आए थे, उन्हें वापस कर दिया गया।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए गाइडलाइन जारी की थी। इसमें चीन-थाईलैंड समेत दूसरे देशों से आने वाले यात्रियों की गहनता से जांच की जानी चाहिए। डॉक्टर व स्टॉफ की सुरक्षा के लिए पीपीपी किट व एन 95 मास्क खरीदने के निर्देश दिए थे। सीएमओ कार्यालय से एन 95 मास्क की जगह चीन में निर्मित ट्रिपल लेयर वाले मास्क खरीद लिए गए।
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हालांकि इसका प्रयोग तत्काल रोक दिया गया। मास्क में हुए खेल की जानकारी शासन को हुई तो शासन ने अफसरों को फटकार लगाई। इसके बाद आधे बचे मास्क को फर्म ने वापस ले लिया। आरोप है निजी फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए यह ऑर्डर दिया गया था।

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एन -95 मास्क में प्रवेश नहीं कर सकता कोई वायरस

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस से बचाव वाला एन 95 मास्क काफी कारगर है। इसमें किसी भी तरह का वायरस प्रवेश नहीं कर पाता है। जबकि ट्रिपल लेयर वाला मास्क सर्जिकल मास्क होता है। इसका एक बार प्रयोग करने के बाद फेंक दिया जाता है। इसमें वायरस के प्रवेश की भी आशंका रहती है।

स्वास्थ्य विभाग ने दिए एक हजार मास्क
कोरोना से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सीएमओ ऑफिस को करीब एक हजार एन 95 मास्क दे दिए थे। सभी मास्क का वितरण स्वास्थ्य कर्मियों को किया गया है, जो कोरोना वॉयरस की जांच में लगे हैं।

सैंपल के तौर पर भेजे थे मास्क
एक कंपनी ने सैंपल के तौर पर चाइनीज मास्क भेजे थे। मामले का पता लगने पर उसकी आपूर्ति रोक दी गई थी। इसके बाद कोरोना वायरस से बचाव के लिए कारगर एन 95 मास्क का ऑर्डर दिया गया था, जिसका सभी जगह पर वितरण किया गया है।  - डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ
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