स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए एन 95 मास्क की जगह चीनी मास्क का ऑर्डर दे दिया था। इसमें सैकड़ों मास्क सीएमओ कार्यालय भेज दिए गए थे। मास्क पर मेड इन चीन लिखा होने पर पूरी खेप को वापस कराया गया। इतना ही नहीं इसके बाद कोरोना वायरस के बजाय प्रदूषण से बचाव वाले एन 95 मास्क खरीद लिए गए।
इसमें आधे मास्क का वितरण भी कर दिया गया। शासन की फटकार के बाद प्रदूषण रोकने वाले मास्क की आधी खेप को वापस किया गया। आरोप है कि कमीशन के खेल में सस्ते चीनी मास्क की खरीद निजी वेंडर से की गई थी।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिस फर्म से मास्क आए थे, उन्हें वापस कर दिया गया।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए गाइडलाइन जारी की थी। इसमें चीन-थाईलैंड समेत दूसरे देशों से आने वाले यात्रियों की गहनता से जांच की जानी चाहिए। डॉक्टर व स्टॉफ की सुरक्षा के लिए पीपीपी किट व एन 95 मास्क खरीदने के निर्देश दिए थे। सीएमओ कार्यालय से एन 95 मास्क की जगह चीन में निर्मित ट्रिपल लेयर वाले मास्क खरीद लिए गए।
हालांकि इसका प्रयोग तत्काल रोक दिया गया। मास्क में हुए खेल की जानकारी शासन को हुई तो शासन ने अफसरों को फटकार लगाई। इसके बाद आधे बचे मास्क को फर्म ने वापस ले लिया। आरोप है निजी फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए यह ऑर्डर दिया गया था।