इस पर अदालत ने समय देकर चेतावनी दी थी कि 17 फरवरी तक अगर नियम नहीं बने तो वन विभाग के प्रमुख सचिव और दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशक को कोर्ट में पेश होना होगा। मगर सोमवार को वन विभाग के प्रमुख सचिव कोर्ट में पेश नहीं हुए और कोर्ट को बताया गया कि वह विधानसभा में व्यस्त हैं।
इस पर कोर्ट ने उन्हें अवमानना नोटिस देनी चाही तो बताया गया कि वह आधे घंटे में कोर्ट पहुंच रहे हैं। अदालत ने गंभीर लापरवाही बताते हुए प्रमुख सचिव वन पर 25 हजार रुपये हर्जाना लगाया। यह हर्जाना 15 दिन में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करना होगा।
हालांकि आधे घंटे बाद प्रमुख सचिव कोर्ट में पेश होकर गैरहाजिरी के लिए माफी मांगी। साथ ही, उन्होंने कोर्ट से नियम बनाने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए तीन माह का समय दिए जाने का आग्रह किया। इस पर कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तीन माह बाद होगी।