कोर्ट में अभियोजन की ओर से बताया गया कि शिकायतकर्ता ऋषिकांत ने 11 जून 2015 को एसपी एंटी करप्शन से शिकायत की थी। कहा था कि वादी बीटेक अंतिम वर्ष का छात्र है और उसने अपना पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन किया था। वादी के पासपोर्ट फॉर्म को सत्यापित करने के लिए मड़ियांव थाने भेजा गया था। फॉर्म के सत्यापन पर पुलिस रिपोर्ट लगवाने के लिए हेड कांस्टेबल राकेश पाल ने शिकायतकर्ता से एक हजार रुपये की मांग की। इस पर भ्रष्टाचार निवारण संगठन की ट्रैप टीम ने राकेश पाल को शिकायतकर्ता से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। शिकायतकर्ता ने कोर्ट में दिए बयान में बताया था कि इससे पहले भी उसने पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन किया था, तब भी दोषी पुलिसकर्मी ने उसे फोन कर बुलाया था। पुलिसकर्मी ने रिपोर्ट लगाने के लिए उस समय भी रिश्वत मांगी थी। रिश्वत न देने पर दोषी पुलिसकर्मी ने प्रतिकूल रिपोर्ट लगा दी थी, जिसकी वजह से उसका पासपोर्ट नहीं बन पाया था।