रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने हिंदुस्तान को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड(एचसीबीएल) पर शुक्रवार को रोक लगा दी। बैंक अब न किसी का पैसा जमा कर सकेगा न ही अपने खाताधारकों को एक लाख से अधिक का भुगतान कर सकेगा।
केंद्रीय बैंक की रोक के बाद राजधानी में एचसीबीएल की शाखाओं में पैसा निकालने वालों की भीड़ लग गई। रकम डूबने की चिंता में खाताधारक देर रात तक बैंक की शाखाओं में जमे रहे। बैंक की जानकीपुरम और नादान महल रोड शाखाओं में नाराज ग्राहकों ने तोड़फोड़ भी की।
आरबीआई के एजीएम अजित प्रसाद ने बताया कि एचसीबीएल की खराब माली हालत की जांच के बाद जनहित में यह पाबंदी छह माल के लिए लगाई गई है। इसके बाद इसकी समीक्षा की जाएगी।
उन्होंने बताया कि आरबीआई के निर्देश एचसीबीएल की शाखाओं के नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दिए गए हैं। प्रसाद के अनुसार बैंक अपने जमाकर्ताओं को उनकी कुल जमा राशि में से अधिकतम 1 लाख रुपये ही दे सकेगा। यह निर्देश बचत व चालू सहित सभी किस्म के खातों पर लागू होगा।
अपने खर्चों के लिए भी बैंक को लेनी होगी अनुमति
अपने खर्चों के लिए भी बैंक को आरबीआई से अनुमति लेनी होगी। बैंक को यह भी साफ तौर पर कहा गया है कि वह अपनी मर्जी से कोई भी देनदारी चुकता नहीं कर सकता, उसे ऐसा करने के लिए आरबीआई से विशेष तौर पर लिखित में अनुमति लेनी होगी।
ये बंदिशें लगीं
- आरबीआई की अनुमति के बिना बैंक न कोई लोन दे सकेगा न उसे रिन्यू कर सकेगा।
- उसे कोई निवेश करने की अनुमति नहीं होगी।
- कोई नया डिपॉजिट स्वीकार नहीं कर सकेगा, फंड नहीं ले सकेगा।
- मार्केट में कोई समझौता नहीं या सौदेबाजी नहीं कर सकेगा।
- अपनी चल व अचल संपत्ति को न बेच सकेगा, न किसी को ट्रांसफर कर सकेगा।
यह कहते हैं एचसीबीएल के सीईओ
मामले पर एचसीबीएल के सीईओ पवन कपूर का कहना है कि बैंक के 50 हजार ग्राहकों के करीब 180 करोड़ रुपये हमारे पास जमा हैं और मौका मिलेगा तो हफ्ते भर में पैसा लौटा देंगे। लेकिन आरबीआई ने इसका मौका ही नहीं दिया।
उलटे कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाली स्थिति पैदा करते हुए नोटिस जारी कर दिया। बैंक को अच्छी क्रेडिट रेटिंग मिलती रही है,किसी खाताधारक को डरने या अफवाहों में उलझने की जरूरत नहीं है।