लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार से सपा सरकार अभी उबर भी नहीं पाई है कि उसे महिला उत्पीड़न और बिजली के बवाल से जूझना पड़ रहा है।
अब इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंड पीठ ने प्रदेश में बिजली किल्लत पर कड़ा रुख अपनाया है।
कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि आखिर क्या वजह है कि प्रदेश में बाकी वीवीआईपी इलाकों की तरह बिजली मुहैया नहीं हो पा रही है।
कोर्ट ने राज्य सरकार से चार हफ्ते में जवाब देने का आदेश दिया है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने यह याचिका दायर की है। बताते चलें कि मंगलवार को हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बदायूं मामले पर भी राज्य सरकार को कुछ निर्देश दिए थे।
केंद्र व राज्य सरकार में चल रहा 'बिजली बवाल'
इन दिनों प्रदेश में बिजली किल्लत से लोग परेशान हैं। और तो और राज्य व केंद्र सरकार के बीच भी 'बिजली युद्ध' चल रहा है।
हाल ही में सपा के एक नेता ने कहा था कि अगर यूपी में बिजली किल्लत है, तो मोदी गुजरात से भिजवा देते।
वहीं, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है कि प्रदेश में बिजली संकट को देखते हुए केंद्र सरकार को भी राज्य सरकार के साथ सहयोग करना चाहिए।
उन्होंने अपने तेवर में केंद्र सरकार से बिजलीघरों को कोयले की आपूर्ति सामान्य कराने के अलावा कहा कि अभी केंद्र हमारी मदद करे, हम 2016 में सब लौटा देंगे।
क्या कहा अखिलेश ने
बिजली संकट पर घिरी सपा सरकार किस कदर दबाव में हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब सीएम अखिलेश यादव खुद केंद्र से बिजली के लिए मिन्नतें कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बिजली किल्लत का ठीकरा पूर्व की प्रदेश सरकार पर फोड़ते हुए भरोसा दिलाया कि वर्ष 2016 तक गांवों को 18 घंटे और शहरों को 22 से 24 घंटे बिजली मिलने लगेगी।
कहा कि मोदी सरकार वर्ष 2016 तक बिजली उधार दे दे तो उसका कर्ज मय ब्याज सपा सरकार चुका देगी।