शनिवार को हाईकोर्ट की एक अहम बैठक में फैसला लिया गया कि इस साल गंगा-यमुना में मूर्ति विजर्सन किया जा सकता है।
शासन की तरफ से इस बात की मोहलत मांगी गई थी। सरकार ने दलील दी थी कि इतने कम समय में वैकल्पिक व्यवस्था करना बहुत मुश्किल है।
इसी संदर्भ में शनिवार को हाई कोर्ट की इलाहाबाद बेंच ने सरकार को सर्शत गंगा और यमुना नदी में मूर्ति पूजा के विजर्सन की अनुमति दे दी है।
यह जानकारी प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव ने दी। उन्होंने बताया कि न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की बेंच की बैठक में यह फैसला लिया गया।
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श्रीवास्तव ने यह भी बताया कि बेंच ने यह भी कहा है कि अगले साल तक किसी भी हालत में वैकल्पिक व्यवस्था करना अनिवार्य होगा।
यह था हाईकोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट ने प्रशासन की सभी दलीलों को नकारते हुए गंगा-यमुना में विसर्जन की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने मूर्तियां डुबाकर वापस निकाल लेने की मांग भी अस्वीकार कर दी है। कोर्ट ने साफ कहा था कि साल भर पहले आदेश देने के बावजूद यदि अधिकारी सोते रहे तो अब जनता का गुस्सा भी भुगतें।