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सुना है क्या: कॉकरोच को लेकर लगेगी ड्यूटी,व्यवस्था का विकेंद्रीकरण; गच्चा खा गए प्रिंसिपल साहब के किस्से

Sat, 25 Jul 2026 10:25 AM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
 
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सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'कॉकरोच को लेकर लगेगी ड्यूटी' की कहानी। इसके अलावा 'गच्चा खा गए प्रिंसिपल साहब' और 'व्यवस्था का विकेंद्रीकरण' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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कॉकरोच को लेकर लगेगी ड्यूटी

प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक आए दिन एक नई ड्यूटी से परेशान रहते हैं। वहीं, अब विभाग के अधिकारी भी रोज-रोज मांगी जाने वाली सूचनाओं को लेकर परेशान हैं। हाल ही में कुत्तों को लेकर की गई सख्ती के बाद स्कूलों में इससे सुरक्षा से जुड़ी जानकारी दी जा रही है। हाल ही में फिर इसकी सूचना देने को लेकर अधिकारियों में चर्चा चल रही थी। सभी इसे लेकर तनाव में थे। इस पर एक ने कहा कि जल्द ही कॉकरोच को लेकर भी सूचनाएं मांगी जाएंगी। इससे सुरक्षा के लिए ड्यूटी लगेगी।

 

गच्चा खा गए प्रिंसिपल साहब

चिकित्सा शिक्षा विभाग के एक प्रधानाचार्य महोदय दो दिन पहले गच्चा खा गए। जो लोग पहले उनके खास थे, उन्होंने ही नोट दिखाकर फोटो खींच ली। उनके साथ ही विभाग की भी बदनामी हुई। नोट का खेल तो विभाग में चलता ही रहेगा लेकिन बदनामी से बचने के लिए नया फार्मूला तैयार किया गया है। मुख्यालय से सभी प्रधानाचार्यों को अलर्ट जारी किया गया है। अब देखना है कि अलर्ट कितना कारगर होता है क्योंकि फोटो तभी खिंचती है, जब ज्यादा नजदीकियां बढ़ती हैं।

 

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व्यवस्था का विकेंद्रीकरण

सरकारी खजाने को ठसाठस भरने में योगदान देने वाले एक विभाग में इन दिनों व्यवस्था का विकेंद्रीकरण जैसा दृश्य है। अंदर से बाहर ब्यूरोक्रेसी के भवनों के गलियारों तक में चाचा चौधरी टाइप कहानियां चल रही हैं कि विभाग में साबू कौन है? कहा जा रहा है कि कई बड़े फिर सक्रिय हो गए हैं। अफसरों ने भी अपनी पहुंच के हिसाब से अपने-अपने आका सेट कर लिए हैं। सेटिंग की इसी चकरघिन्नी में फंसे अफसर फुसफुसा रहे हैं कि रामराज आ गया है। सबका काम प्रभु की कृपा से हो रहा है।
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