ये चमन यूं ही रहेगा, हजारों पंक्षी अपनी-अपनी-बोलियां बोलकर उड़ जाएंगे। राम जन्मभूमि/बाबरी मस्जिद विवाद के पक्षकार के रूप में मुस्लिम पक्ष से यलगार करने वाले मो. हाशिम अंसारी की आंखें बूढ़ी हो चली हैं।
छह दिसंबर की पूर्व संध्या पर वह अपनों के बीच बैठे बरबस मुस्कराते हुए कह पड़ते हैं कि सबका एक ही प्रश्न कि कब निपटेगा विवाद। हाथ हिलाते हुए कहते हैं कि कुछ नहीं होगा, अशोक सिंघल चले गए। और भी फल पक चुके हैं।
94 वर्ष की अवस्था, बीमारी से लाचार लेकिन आज भी हाशिम की आवाज में जवानी की खनक बरकरार है। छह दिसंबर पर विवादित ढांचा ढहाए जाने की 23वीं बरसी पर पूछा गया तो चाचा हाशिम शुरू हो गए, कह पड़ते हैं कि अयोध्या में छह हजार मंदिर हैं। रेशम का पर्दा पड़ा है। आराम से कीर्तन होता है। कोई हल्ला नहीं मचाता लेकिन वहां मंदिर नहीं जेल खाना बना दिया है। हम रामलला को जेल में नहीं देखना चाहते। अदालत के साथ देश की जनता भी परेशान है।
कहा कि हमें कानून पर भरोसा है। फैसला जल्द होना चाहिए। हमें मिले या उन्हें। हमने तो हिंदू पक्ष के 11 साल बाद मुकदमा किया। हम तो चाहते हैं सबूत की बुनियाद पर फैसला हो भले ही हमारे खिलाफ जाए।
हमारे हाथ में होता तो मुकदमा उठा लेता
हाशिम कहते हैं, अब ये मुद्दा राजनीति का अखाड़ा बन गया है। अगर हमारे हाथ में होता तो हम भी मुकदमा कब का उठा लेते। हमारे जाने के बाद मुकदमे की पैरोकारी हमारा लड़का इकबाल करेगा लेकिन लाठी-डंडे से और न ही गंदी तकरीर से बल्कि सद्भावना व प्रेम से ही कर सकता है।
हाशिम ने कहा, हो सकता है हमारी आने वाली नस्ल शायद विवाद का हल देख ले। कहा कि हर 15 दिन पर एएसआई वाले आते हैं। साथ ही जिले के आला अधिकारी समोसा मिठाई खाते हैं और चले जाते हैं। हमने इसीलिए वहां जाना छोड़ दिया, क्या देखने जाएं।
पीएम मोदी से मिलने की है ख्वाहिश
हाशिम ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की ख्वाहिश है, एक बार मिलकर अपनी बात रखने का मन है। बाकी वो हुकूमत के बादशाह हैं, उनका काम है जनता के जानमाल की हिफाजत करना।
अपनी डबडबाई आंखों से आसमां की ओर देखते हुए कहते हैं सब सियासत है। भाजपा ही नहीं चाहती कि मंदिर बने और एक शेर बिगड़ा हुआ समाज है, बिगड़ा हुआ मिजाज, पहने हुए हैं भेड़िए इन्सानियत का ताज... पढ़ते-पढ़ते बातों को खत्म कर हाशिम हांफने लगते हैं और लेट जाते हैं।