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लखनऊः गरीब मरीजों का सहारा बना हरिओम सेवा केंद्र, यूं करता है मदद

Sat, 18 Jan 2020 12:38 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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समाजसेवी चंद्र किशोर रस्तोगी - फोटो : अमर उजाला
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केजीएमयू में गरीब मरीजों के लिए हरिओम सेवा केंद्र दवा से लेकर रखने व खाने तक का इंतजाम करता है। रैन बसेरा बनाया है तो खाने के लिए सुबह-शाम रसोई चलती है। इस केंद्र के संचालन की जिम्मेदारी निभा रहे समाजसेवी चंद्र किशोर रस्तोगी बताते हैं कि लखनऊ के करीब एक हजार से ज्यादा समाजसेवी संस्था के आजीवन सदस्य हैं।
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वे गरीबों की सेवा में निरंतर आर्थिक सहयोग कर रहे हैं। केंद्र के संस्थापक व संरक्षक चंद्र किशोर रस्तोगी की ख्वाहिश है कि संस्था के लिए कहीं ऐसी जमीन मिल जाए, जहां पर धर्मशाला का निर्माण कराया जा सके। वह बताते हैं कि 22 जून 1998 को हरिओम सेवा केंद्र की स्थापना की गई।

शुरुआती दौर में यह काम नामुमकिन लग रहा था, लेकिन धीरे-धीरे लोग जुड़ते गए। इसके बाद केजीएमयू में आने वाले गरीबों की सेवा शुरू की गई। अब स्थिति यह है कि क्वीन मेरी हॉस्पिटल के पास मीरो बीवी विश्राम सदन में संस्था का कार्यालय है। मरीजों के लिए एक एंबुलेंस हैं।
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रहने व खाने का इंतजाम

संस्था के कार्यकर्ता सुबह सभी वार्डों में गरीब मरीजों को जरूरी दवाएं बांटते हैं। इन दवाओं के लिए राजधानी की कुछ संस्थाएं और कुछ लोग आर्थिक सहयोग करते हैं। इसमें तमाम ऐसे भी लोग हैं जो संस्था को दवाएं दे जाते हैं, लेकिन अपना नाम उजागर करना नहीं चाहते।

चंद्र किशोर बताते हैं कि कई बार महंगी दवाएं उपलब्ध नहीं होती हैं। ऐसी स्थिति में राजधानी के दानियों से संपर्क किया जाता है। संस्था की ओर से देहदान व नेत्रदान के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है। दानदाताओं की मदद से नेत्र चिकित्सा शिविर का भी आयोजन किया जाता है।

ट्रामा सेंटर में तीमारदारों को रुकने के लिए रैन बसेरे का भी इंतजाम किया जाता है। यहां रुकने वालों को कंबल से लेकर बर्तन तक दिए जा रहे हैं। इसी तरह चेस्ट हॉस्पिटल के पीछे मिली जगह में रसोई भी चल रही है। केंद्र की रसोई में सुबह-शाम प्रतिदिन करीब पांच सौ लोगों को भोजन कराया जाता है। यहां कुछ ऐसे भी लोग आते हैं, जो अपने बच्चे व परिवारीजनों के जन्मदिन, तीज त्योहार पर रसोई का खर्च उठाते हैं।
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