योगी सरकार के मंत्रिमंडल में आधी आबादी का पूरा ध्यान रखा गया है। पिछली बार की तरह इस बार भी पांच महिलाओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। इसमें तीन दलित और दो ब्राह्मण हैं। जातीय संतुलन के साथ अलग-अलग क्षेत्र की महिलाओं को कैबिनेट में शामिल कर क्षेत्रीय सामंजस्य बनाने की कोशिश की गई है।
इस बार विधानसभा चुनाव में कुल 45 महिलाएं चुनी गई हैं। इनमें भाजपा से 28, अपना दल से 3, सपा से 13 और कांग्रेस से एक महिला विधायक बनी है। योगी 2.0 मंत्रिमंडल में शामिल पांच महिलाओं में बेबी रानी मौर्य को कैबिनेट मंत्री, गुलाब देवी को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और प्रतिभा शुक्ला, रजनी तिवारी व विजय लक्ष्मी गौतम को राज्यमंत्री बनाया गया है।
महिलाओं की मंत्रिमंडल में भागीदारी के मामले में वर्ष 2017 की स्पष्ट छाप दिखती है। 2017 के चुनाव में कुल 43 महिलाएं विधायक बनी थीं। इसमें 37 भाजपा की, एक अपना दल, दो सपा, एक कांग्रेस और दो बसपा की थीं। योगी 1.0 मंत्रिमंडल में रीता बहुगुणा जोशी को कैबिनेट मंत्री, अनुपमा जायसवाल और स्वाति को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और गुलाब देवी व अर्चना पांडेय को राज्यमंत्री बनाया गया था। हालांकि बाद में संगीता बलवंत को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था।
बेबी रानी को सत्ता व संगठन में कार्य का मिला इनाम
करीब तीन दशक से राजनीति में सक्रिय बेबी रानी मौर्य को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। उन्हें सत्ता से लेकर संगठन तक कार्य करने के अनुभव का इनाम मिला है। वे भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा में भी काम कर चुकी हैं। वे 1995 में आगरा की महापौर भी रही हैं। सामाजिक कल्याण बोर्ड, राष्ट्रीय महिला आयोग सहित विभिन्न बोर्डों में भी उन्होंने कार्य किया है। बीए, बीएड डिग्रीधारी बेबीरानी वर्ष 2007 में भाजपा के टिकट पर एत्मादपुर से मैदान में उतरीं, लेकिन हार गईं। वे 21 अगस्त 2018 का उत्तराखंड का राज्यपाल बनीं। इस बार उन्होंने आगरा देहात से चुनाव लड़ा और जीत गईं।
गुलाब देवी को मिली प्रोन्नति
संभल के चंदौसी से विधायक गुलाब देवी दोबारा मंत्री बनी हैं। योगी 1.0 मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री रहीं गुलाब को इस बार प्रोन्नति देकर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। वे इंटर कॉलेज में प्रवक्ता और प्रधानाचार्य का पद छोड़ने के बाद राजनीति में आई हैं। करीब 66 साल की गुलाब देवी राजनीति विज्ञान में एमए हैं। अनुसूचित जाति की गुलाब देवी भाजपा के टिकट पर 2002 में पहली बार विधायक बनीं। फिर 2017 और अब 2022 में विधायक चुनी गईं।
तीन बार से विधायक हैं प्रतिभा
अकबरपुर रनियां से भाजपा के टिकट पर दूसरी बार विधायक बनीं प्रतिभा शुक्ला ने सियासी सफर की शुरुआत बसपा से 2006 में की। वे 2007 में बसपा के टिकट पर चौबेपुर से विधायक बनीं। परिसीमन में चौबेपुर सीट खत्म होने के बाद 2012 में वे अकबरपुर रनियां से मैदान में उतरीं और हार गईं। फिर उन्होंने भाजपा का दामन थामा और 2017 में विधायक बनीं। परास्नातक डिग्रीधारी प्रतिभा को 2022 में भाजपा से दोबारा जीतने के बाद मंत्री पद मिला है। इनके पति अनिल शुक्ला वारसी बसपा के बिल्हौर लोकसभा क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं।
चौथी बार विधायक बनने पर रजनी को मिला इनाम
राज्यमंत्री रजनी तिवारी हरदोई के शाहाबाद से विधायक हैं। वर्ष 2007 में इनके पति उपेंद्र तिवारी विधायक चुने गए थे। उनके निधन पर हुए उपचुनाव में बसपा ने रजनी को मैदान में उतरा और विजयी हुईं। दोबारा 2012 में सवायजपुर से बसपा विधायक रहीं। वर्ष 2017 में भाजपा में आई और बिलग्राम से विधायक बनीं। वर्ष 2022 में उन्हें चौथी बार विधायक चुना गया है। करीब 42 साल की रजनी स्नातक हैं।
घर वापसी पर विजय लक्ष्मी का सम्मान
देवरिया के सलेमपुर से विधायक विजय लक्ष्मी गौतम महिला मोर्चा में नगर अध्यक्ष से क्षेत्रीय मंत्री तक की जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। वर्ष 2012 में भाजपा ने सलेमपुर सुरक्षित सीट से उन्हें उम्मीदवार बनाया, लेकिन वे चुनाव हार गई। वर्ष 2017 में भाजपा ने टिकट काटा तो वह सपा में चली गई और चुनाव लड़ा, लेकिन फिर हार गईं। वर्ष 2022 के चुनाव से ठीक पहले फरवरी में वे भाजपा में लौटीं और भाजपा से विधायक बनीं। दलित वर्ग की विजय लक्ष्मी समाजशास्त्र से एमए हैं।