लखनऊ। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले कुछ सालों में अस्पताल खोलने का लाइसेंस रेवड़ी की तरह बांटा है। लाइसेंस जारी करने से पहले स्थलीय निरीक्षण तक नहीं किया गया। नतीजा, शहर से गांव तक ऐसे करीब 300 अस्पताल हैं जो बेसमेंट, दुकानों और मानकों के विपरीत बने संकरे भवनों में संचालित हो रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि इन अस्पतालों में न तो आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम हैं, न ही आपात स्थिति में मरीजों को बाहर निकालने की व्यवस्था। अस्पतालों में प्रवेश का एक ही द्वार है। राजधानी में करीब एक हजार से अधिक निजी अस्पताल व क्लीनिक का संचालन हो रहा है। इसमें 250 से अधिक अस्पताल लखनऊ नर्सिंग होम एसोसिएशन के हैं, जो उन्हीं के भवनों में संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में दूसरी विधा के डॉक्टरों के अस्पताल बेसमेंट, दुकानों में संचालित हो रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के नियमों के मुताबिक अस्पताल चलाने के लिए पंजीकरण और अग्निशमन विभाग की एनओसी जरूरी है। जबकि बड़ी तादाद में ऐसे अस्पताल हैं जिनके पास फायर एनओसी नहीं है। अग्निशमन से जुड़े प्रबंधन के बाबत शपथपत्र लेकर उनका पंजीकरण कर दिया गया। कुछ ऐसे भी हैं जिनका सीएमओ कार्यालय में पंजीकरण नहीं है।
आधे से ज्यादा अस्पतालों का पंजीकरण ही नहीं
बीते डेढ़ वर्ष में सीएमओ कार्यालय की टीम ने 50 से अधिक अस्पतालों की जांच की। इस अभियान में 50 फीसदी अस्पताल ऐसे मिले, जिनका या तो पंजीकरण नहीं था, या फिर पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं कराया गया था। इसके बाद भी अस्पताल में मरीज भर्ती कर इलाज किया जा रहा था। जिन अस्पतालों के बारे में शिकायत मिलती है, कार्रवाई के नाम पर उन्हें सिर्फ नोटिस थमाया जा रहा है।
आपातकालीन निकास की व्यवस्था नहीं
सबसे गंभीर स्थिति उन अस्पतालों की है जहां बेसमेंट में इमरजेंसी सेवाएं चल रही हैं। कई जगह आईसीयू और वेंटिलेटर यूनिट भी बेसमेंट में संचालित हैं। यहां आने-जाने के लिए एक ही रास्ता है, वो भी संकरा। भवन में आपातकालीन या वैकल्पिक रास्ता न होने से आपात स्थिति में स्ट्रेचर, ऑक्सीजन सिलिंडर और वेंटिलेटर वाले गंभीर मरीजों को निकालना बड़ी चुनौती बन सकता है।
इन मार्ग पर सबसे अधिक अस्पताल
- ठाकुरगंज के दुबग्गा मार्ग पर करीब 100 से अधिक अस्पताल।
- गुडंबा कुर्सी रोड पर दुकानों में और बेसमेंट में अस्पताल।
- आईआईएम रोड पर बेसमेंट में कई अस्पतालों का संचालन।
- पारा इलाके में बेसमेंट और दुकानों में चल रहे अस्पताल।
- पुराने लखनऊ के नक्खास इलाके में दुकानों में अस्पताल।
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बेसमेंट में चल रहे अस्पतालों पर नकेल कसी जाएगी। मानक पूरा न करने वाले अस्पतालों का संचालन किसी भी दशा में नहीं होने दिया जाएगा।
- डॉ. एनबी सिंह, सीएमओ