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SMS या मिस्ड कॉल करें, मदद को पहुंचेगी जीआरपी

Sun, 09 Nov 2014 01:46 AM IST
निशांत कुमार यादव/अमर उजाला, लखनऊ
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यदि आपके साथ चलती ट्रेन में कोई अपराध हो गया हो और त्वरित जीआरपी की मदद की जरूरत पड़े तो बस एक एसएमएस या फिर मिस्ड कॉल करें। यात्रियों के लिए यह सुविधा जीआरपी दो सप्ताह के भीतर शुरू करने जा रही है।
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जीआरपी ने एसएमएस पर शिकायत दर्ज कराने के लिए मोबाइल नंबर 8400000948 आवंटित किया है। इस नंबर को जीआरपी मुख्यालय के कंट्रोल रूम और प्रदेश के सभी जीआरपी अनुभागों, थानों और चौकियों से जोड़ा जाएगा। चलती ट्रेन में कोई भी हादसा होने पर इस नंबर पर यात्री को अपनी ट्रेन नंबर, बोगी नंबर, सीट संख्या, अपना नाम, आखिरी लोकेशन और घटना का विवरण लिखकर एसएमएस करना होगा।

यदि यात्री के मोबाइल में बैलेंस कम हो और वह एसएमएस भी नहीं कर सकता तो वह मिस्ड कॉल भी कर सकता है। यात्री की सूचना मिलते ही संबंधित अनुभाग और जीआरपी थाने पर उसे एसएमएस कर दिया जाएगा।
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निकटवर्ती जीआरपी थाने से यात्री तक मदद पहुंचाई जा सकेगी। यही नहीं आसानी से पहचान के लिए प्लेटफार्मों पर जीआरपी के तैनात जवान अब फ्लोरोेसेंट जैकेट में नजर आएंगे। इन जैकेटों पर जीआरपी अनुभाग का नाम भी दर्ज होगा। प्लेटफार्मों पर तैनात होने वाले 300 जवानों को फ्लोरोसेंट जैकेट मुहैया कराई जाएंगी।

इस तरह बढ़ेगी यात्रियों के लिए सुविधा

आए दिन शिकायत मिलती है कि दैनिक यात्री ट्रेनों में आरक्षित सीटों पर कब्जा कर लेते हैं। इसे देखते हुए अब जीआरपी दैनिक यात्रियों का सत्यापन करवाएगी। दैनिक यात्रियों की एमएसटी के फार्म पर दर्ज विवरण के आधार पर संबंधित थानों में उनका अपराधिक ब्यौरा भी एकत्र किया जाएगा। जीआरपी कुछ एमएसटी धारकों को पुलिस मित्र बना रही है जो अराजकता फैलाने वाले एमएसटी धारकों के बारे में पुलिस को सूचना उपलब्ध कराएंगे।

हर शव का होगा फॉरेंसिक परीक्षण
ट्रेनों और स्टेशन परिसर में होने वाली लूट, डकैती, हत्या, जहरखुरानी, चोरी और बलात्कार जैसी घटनाओं के वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए घटना की फोटोग्राफी, खून के कपड़े और अन्य वस्तुओं के सैंपल एकत्र करने में सावधानी बरती जाएगी। घटना में इस्तेमाल हथियारों की पैकेजिंग, फिंगर प्रिंट, पद चिन्ह एकत्र करने के लिए जीआरपी के हर थाने के जवानों को फॉरेंसिक प्रशिक्षण दिया गया है।

अज्ञात शवों की शिनाख्त के लिए उनका ब्लड सैंपल और डीएनए एकत्र करने का प्रशिक्षण भी दिया गया है। वहीं पिछले दिनों लखनऊ मेल से चारबाग स्टेशन पर एक शव को बच्चों से उठवाने की घटना को जीआरपी मुख्यालय ने गंभीरता से लिया है।

जीआरपी अब पटरी पर पाये गए शवों को अपने जवानों से उठवाएगी। इसके लिए उनको ग्लब्स, मॉस्क और प्लॉस्टिक के एब्रेन मुहैया कराए जाएंगे। जीआरपी शवों को रखने के लिए बॉडी बैग भी उपलब्ध कराए जाएंगे इसके लिए पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखा गया है।
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सीसीटीवी से रियल टाइम मॉनीटरिंग

जीआरपी ने लखनऊ के चारबाग स्टेशन को रियल टाइम मॉनीटरिंग के जरिए कंट्रोल रूम से जोड़ा है। इससे स्टेशन परिसर में नो-पार्किंग जोन में खड़े वाहनों का ई-चालान भी किया जा रहा है। अब इसे कानपुर सहित बड़े रेलवे स्टेशनों पर भी लागू किया जाएगा।

इस सिस्टम से लखनऊ में हर माह औसतन 200 ई-चालान हो रहे हैं। जीआरपी मुख्यालय के नियंत्रण कक्ष को और अधिक आधुनिक बनाया जाएगा। इससे नियंत्रण कक्ष में आने वाली सूचनाओं को त्वरित गति से निस्तारित किया जा सकेगा। इसके लिए जीआरपी मुख्यालय और लखनऊ अनुभाग को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। दो सप्ताह में इसका तकनीकी प्रदर्शन किया जाएगा।

दो माह में मिले 144 लापता बच्चे
प्रदेश भर में रेलवे प्लेटफार्मों पर दो माह में 144 लापता बच्चे जीआरपी को बरामद हुए हैं। इनमें से 125 बच्चों को उनकेपरिवारीजनों को सौंप दिया गया जबकि 119 बरामद बच्चों को चाइल्ड लाइन व अन्य संस्थाओं के पास पहुंचाया गया है। जीआरपी उन स्टेशनों और ट्रेनों में भी अपने कंट्रोल रूम के स्टीकर लगा रही है जहां जीआरपी मौजूद ही नहीं है।
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