ट्रेनों में अपराध पर काबू पाने के लिए राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) अपनी परंपरागत कार्यप्रणाली में बदलाव करने जा रही है। अब जीआरपी ट्रेन में अपराध करने वालों को जेल के भेजने के बाद भी उन पर नजर रखेगी। जिससे उनके जमानत पर रिहा होते ही ट्रेनों में चलने वाले स्क्वॉयड को इस बारे में सतर्क किया जा सके।
ट्रेनों में अपराध रोकने के लिए जीआरपी अभी पारंपरिक शैली में काम कर रही है। इसमें अपराधियों को जेल भेजने के बाद जीआरपी की भूमिका समाप्त मान ली जाती है। नतीजा चंद महीनों में ही जेल से रिहा होकर यह बदमाश फिर से ट्रेनों में लूटपाट, हत्या, छिनैती व जहरखुरानी जैसे अपराधों में लिप्त हो जाते हैं।
इससे लंबे समय तक अपराध लगाम नहीं लग पाती है। अब जीआरपी ने अपराध नियंत्रण के लिए पुलिसिंग में कई बदलाव कर रही है। पिछले दिनों अपर पुलिस महानिदेशक रेलवे विजय कुमार मौर्य की अध्यक्षता में हुई बैठक में इसका फैसला हुआ था। नई व्यवस्था के मुताबिक पुलिस अब बदमाशों का पीछा तब तक नहीं छोड़ेगी,
जब तक वह ट्रेनों में अपराध न छोड़ दें। इसके लिए जेल में अपराधी की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ही घर-परिवार के सदस्यों से भी संपर्क किया जाएगा। उन्हें इस बात के लिए जागरूक किया जाएगा कि उसे यह रास्ता छोड़ने के लिए समझाएं। एडीजी रेलवे ने सभी एसपी रेलवे को नई व्यवस्था पर अमल करने को कहा है।