प्रदेश में कई क्षेत्रों में भूजल के प्रदूषित होने की रिपोर्ट मिलने के सरकार ने इसके समाधान की कवायद शुरू कर दी है। इसके तहत सरकार ने राजधानी में स्थित भारतीय विष विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के भूजल के नमूनों की जांच कराने का फैसला किया है। इसके लिए भूगर्भ जल विभाग ने संस्थान के साथ एमओयू किया है।
जलशक्ति विभाग के अधीन काम करने वाले भूर्गभ जल विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में भूमिगत जल के नमूनों की जांच का कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से सिंचालित किया जाएगा। खास तौर पर रिवर बेसिन को चिह्नित कर भूजल के गुणवत्ता की जांच की जाएगी।
इसी कड़ी में पोस्ट मानसून के बाद हिंडन रिवर बेसिन में भूजल के नमूनों की जांच की जाएगी। इससे पहले प्री मानसून अवधि में हिंडन रिवर बेसिन के भूजल की जांच हो चुकी है। अब पोस्ट मानसून के बाद की जाने वाली जांच रिपोर्ट के आधार पर हिंडन रिवर बेसिन के भूजल के गुणवत्ता का अध्ययन किया जाएगा। इसके आधार पर ही इसके पानी के उपयोग में लाने की रणनीति तैयार की जाएगी।