41.4 किलोमीटर के आसपास सड़क किनारे मिट्टी के भारी-भरकम ढेर दिखाई दिए। पड़ताल के दौरान पूरे एक्सप्रेसवे पर दोनों तरफ ऐसे करीब 42 स्थान सामने आए। 47 किलोमीटर तक पहुंचने पर तीन बड़े पैचवर्क दिखाई दिए। करीब 50 किलोमीटर के आसपास सड़क की ऊपरी सतह अपेक्षाकृत ठीक दिखाई दी, लेकिन 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पर वाहन चलाते समय सात स्थानों पर सड़क के असमतल होने का अहसास हुआ।
कानपुर से लखनऊ की दिशा में करीब 60 किलोमीटर के पास सड़क के एक बड़े हिस्से को पूरी तरह उखाड़कर दोबारा बनाने का काम मिला। यह पैच करीब 100 मीटर लंबा दिखाई दिया। करीब 64 किलोमीटर के पास जिस हिस्से पर पैचवर्क किया गया था, वह भी दोबारा उखड़ा हुआ दिखाई दिया। इसी स्थान पर मिट्टी धंसने के कारण पैचवर्क में दरारें भी नजर आईं।
69 किलोमीटर के आसपास करीब 100 मीटर लंबा पैचवर्क किया जा रहा था। सड़क के एक हिस्से की खुदाई चल रही थी। 69.6 किलोमीटर के पास भी एक बड़ा पैचवर्क मिला। इन स्थानों पर तीन लेन पर काम चलता दिखाई दिया और केवल एक लेन से यातायात गुजर रहा था। कानपुर से लखनऊ की दिशा में 69 किलोमीटर के बाद कई जगह वाहन के उछलने जैसा अहसास हुआ।
कानपुर से लखनऊ की तरफ लौटते समय करीब 50 से 45 किलोमीटर के बीच कई जगह सड़क की ऊपरी सतह असमतल मिली। 36 किलोमीटर के आसपास बड़ा पैचवर्क किया जा रहा था। 30.6 किलोमीटर के पास भी करीब 100 मीटर लंबा पैचवर्क मिला।
नालियां बनीं लेकिन सवाल भी खड़े
एक्सप्रेसवे पर सड़क के दोनों तरफ ग्रेन्युलर शोल्डर बनाए जाते हैं। इनका एक महत्वपूर्ण काम सड़क के किनारे पानी के बहाव और संरचना को सहारा देना है। पड़ताल में कई जगह शोल्डर के किनारे दो-दो फीट तक लंबी घास दिखाई दी।
निर्माण से जुड़े जानकारों के मुताबिक यदि पानी सड़क के किनारे जमा होता है और उसकी सही निकासी नहीं होती तो पहले शोल्डर और उसके नीचे की परत प्रभावित हो सकती है। इसके बाद सड़क के नीचे की मिट्टी कमजोर होने पर उसका असर ऊपर की डामर सतह पर दिखाई दे सकता है। एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में मिट्टी के ढलान भी कटे हुए दिखाई दिए। मिट्टी बहकर नीचे आने के कारण कई स्थानों पर किनारे की संरचना को दोबारा भरने की जरूरत दिखाई दी।
मरम्मत का काम तेज, पीएनसी ने बढ़ाई सक्रियता
लंबे समय से सामने आ रही शिकायतों और अब सड़क की हालत पर सवाल उठने के बाद पीएनसी इंफ्राटेक की ओर से कई स्थानों पर मरम्मत का काम तेज कर दिया गया है। बुधवार को मौसम ने भी साथ जिससे मरम्मत की रफ्तार तेज हुई। हाईवे निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि जिस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हुए अभी एक महीना ही हुआ है, वहां इतनी बड़ी संख्या में पैचवर्क और पुनर्निर्माण की जरूरत क्यों पड़ रही है।