रामपुर यूपी की ऐसी सीट है जिस पर मुसलमान वोट लगभग 52 फीसदी हैं। यहां पर आजम खां का इतना खौफ है कि लोग खुलकर कुछ नहीं बोलते, जानें क्या हैं जमीनी हालात।
इस सीट पर लंबे समय तक नवाब परिवार का कब्जा रहा है। पांच बार जुल्फिकार अली खान और दो बार उनकी बेगम नूरबानो सांसद चुनी गईं। वर्ष 2004 और 2009 में सपा प्रत्याशी के रूप में फिल्म अभिनेत्री जयाप्रदा सांसद चुनी गईं।
वह बिजनौर लोकसभा सीट से रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। कांग्रेस ने मरहूम जुल्फिकार अली खान (मिक्की मियां) और बेगम नूरबानो के विधायक पुत्र काजिम अली खां (नवेद मियां) को प्रत्याशी बनाया है।
सपा ने आजम खां के नजदीकी नसीर अहमद खां को मैदान में उतारा है। वह एक बार विधायक का चुनाव लड़ चुके हैं।
आप से सलमान अली खां
भाजपा ने स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से 1986 से विधान परिषद सदस्य डॉ. नैपाल सिंह को और बसपा ने पांच बार के विधायक एवं पूर्व राज्यमंत्री हाजी अकबर अली को उम्मीदवार बनाया है।
आम आदमी पार्टी से सलमान अली खां पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। उनका सियासी बैकग्राउंड नहीं है।
जेल रोड पर बिजली के सामान की दुकान करने वाले सैयद खुर्शीद मियां संयुक्त अरब अमीरात से कई साल बाद रामपुर लौटे हैं। कहते हैं, शहर में विकास तो हुआ है लेकिन कारोबार घट गया है।
सैयद खुर्शीद कहते हैं कि 1977 में उन्होंने पहला वोट आजम खां को दिया था। तभी से उनके साथ हैं। उनकी दुकान पर खड़े कलकत्ता मोहल्ले के सैयद आजम की बग्गी गांव में पिलिंग मशीन थी जो अब बंद हो गई हैं।
यहां का लकड़ी कारोबार खत्म हो गया
सैयद आजम कहते हैं, सड़कें चौड़ी हुई हैं लेकिन बेरोजगारी बढ़ गई है। तीन सौ से ज्यादा पिलिंग मशीन बंद हो गई हैं। रामपुर प्लाईवुड बनाने का बड़ा केंद्र बन गया था।
लकड़ी की यह मंडी सरकार की नजरें तिरछी होने से उजड़ गईं। बाजार सफदरगंज में कपड़े की दुकान पर तीन चार लोग बैठे हैं। नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, यहां कांग्रेस का मुकाबला भाजपा से है।
सपा की मौजूदा सरकार से लोग नाखुश हैं। रामपुर ने पिछले विधानसभा चुनाव में आजम खां को 60 फीसदी वोट देकर जिताया था लेकिन दो साल में रोटी और कारोबार छिने हैं।
शहरी वर्ग को चुनाव में दिलचस्पी नहीं
नवाबों के शहर के नाम से मशहूर रामपुर संसदीय क्षेत्र का चुनावी माहौल अलग है। पश्चिमी यूपी की दूसरी सीटों के उलट यहां के वोटरों, खासतौर पर शहरी इलाके के लोगों ने काफी हद तक खामोशी ओढ़ रखी है।
वे अपनी बात रखने से बच रहे हैं, कुछ बोलते हैं तो नाम का खुलासा नहीं करना चाहते। ‘विकास बनाम बेरोजगारी’ पर बंटे लोगों के बीच चर्चा में प्रत्याशी कम, नगर विकास एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आजम खां ज्यादा होते हैं।
वे रामपुर से विधायक हैं और सपा एवं सरकार में खासे रुतबेदार माने जाते हैं। शहर में तो लामबंदी भी आजम खां के पक्ष और विपक्ष में हो रही है।
हारे-जीते कोई भी प्रतिष्ठा नवाब खानदान और आजम, दोनों की ही दांव पर लगी है।
डरते हैं यहां के लोग
रामपुर के बाजार नसरुल्ला खां में 20 साल से फलों का कारोबार करने वाले बुजुर्ग अपने ठेले के पास खड़े हैं। चुनावी रुझान के बारे में पूछने पर कहते हैं, पब्लिक डरी हुई है।
अपनी राय का इजहार नहीं कर पा रही है। पब्लिक परेशान है, लोगों के कारोबार छिन गए। आरा मशीन, दुकानदारी बंद हो गई है।
नाम पूछने पर कहते हैं, नाम न पूछिये, वरना कल से ठेला नहीं लगेगा। उन्हीं के सामने फूल-धूपबत्ती के पुश्तैनी कारोबारी मो. जुनेद कहते हैं, यहां कांग्रेस के झंडे दिखाई नहीं देंगे।
सत्ता का डर जो है। वह मानते हैं कि मुकाबला कांग्रेस और सपा के बीच है। दोनों की लड़ाई में भाजपा को भी फायदा हो सकता है।
सबके हैं अलग अलग हैं मुद्दे
मिस्टनगंज बाजार में इलेक्ट्रिकल आइटम्स की शॉप चला रहे विनय रस्तोगी कहते हैं कि विकास को लेकर लोग बंटे हुए हैं। कुछ लोग पुराना गेट तोड़ने को सही मानते हैं तो कुछ गलत।
उनके बराबर में इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स के कारोबारी दीपक कहते हैं, चूने वाला फाटक जर्जर है, उसे नहीं तोड़ा गया। मिस्टनगंज गेट को मजबूत होने के बाद भी तोड़ दिया गया।
दोनों ही व्यापारी कांग्रेस और सपा में मुकाबला मानते हैं लेकिन उनकी लड़ाई में भाजपा की संभावना भी देख रहे हैं।
कुल मतदाताओं की संख्या-15,78,951, महिला मतदाता-7,23, 715, पुरूष मतदाता- 8, 54, 877
मुस्लिम वोटों के बंटवारे पर भाजपा को लाभ
खरसौल बस अड्डे पर शमां खां के मार्केट में चाय की दुकान पर कई लोग बैठे हुए हैं। शमां खां को मुस्लिम वोटों के बंटवारे में भाजपा को लाभ होता दिख रहा है।
वह कहते हैं, उनके इलाके में मुकाबला सपा और भाजपा के बीच है। किशनपुर के अबरार कांग्रेस और सपा में मुकाबला देख रहे हैं लेकिन मो. उवैस को कांग्रेस, सपा और भाजपा में तिकोनी टक्कर लग रही है।
इस गांव में फल विक्रेता होरी लाल को मोदी लहर दिख रही है।