फतेहपुर सीकरी का सिकंदर कभी कोई एक नहीं रहा। न तो वे राजपूत, जिनकी तूती बोलती थी और न वे मुगल, जिनकी तोप गरजती थी।
समय के साथ बदलाव की बयार यहां भी बहती रही है। अगर इन दिनों मोदी की लहर है तो एक बड़े वर्ग की चुप्पी भी। इस वजह से लाल पत्थर की चट्टानों से टकराकर आने वाली गर्म हवाएं इस लोकसभा सीट के प्रत्याशियों के पसीने छुड़ा रही हैं।
यह हाल तब है जब 24 अप्रैल का मतदान सामने खड़ा है। भाजपा ने पूर्व विधायक रहे चौधरी बाबू लाल, बसपा ने वर्तमान सांसद सीमा उपाध्याय, सपा ने अपने मंत्री अरिदमन सिंह की पत्नी पक्षालिका सिंह को मैदान में उतारा है।
रालोद-कांग्रेस गठबंधन से अमर सिंह और आम आदमी पार्टी से राजनीति में प्रवेश करने वाली लक्ष्मी चौधरी समेत 28 प्रत्याशी मैदान में हैं।
मोदी के कारण यहां मुश्किल
अमर सिंह 18 साल से राज्यसभा सदस्य हैं लेकिन पहली बार लोकसभा के चुनाव मैदान में हैं।
ऐसे में मोदी की लहर के बीच जो प्रत्याशी सीकरी से संसद का रास्ता तय करने के लिए जातीय समीकरण की राह पर चल रहे थे, उनका गणित गड़बड़ा गया है।
गांवों की धूल फांकने के बाद भी वे वोटरों के मिजाज को नहीं भांप पा रहे। ऐसा भी नहीं है कि सीकरी की फिजा में सिर्फ मोदी की ही बयार बह रही है। युवा वोटरों को छोड़ दें तो पुराने अभी भी पत्ता नहीं खोल रहे।
दो पीढ़ियों के इसी फासले ने सीकरी के सूरमाओं को संशय में डाल दिया है। युवा पीढ़ी तो नमो की बयार में बह रही है, लेकिन पुराने वोटर की चुप्पी कुछ और इशारा कर रही है। ठाकुर बहुल साधन गांव के पुरानों को ही ले लीजिए।
अभी कुछ भी नहीं निश्चित
यहां एक दुकान के बाहर बैठे कुछ उम्रदराज लोगों के बीच कुंवर जाहिद अली जादौन कहते हैं, अभी तो हम सभी की बातें सुन रहे हैं। मगर, वोट किसको डालना है इसका फैसला मतदान से एक-दो दिन पहले ही करेंगे।
नानऊ गांव के 60 वर्षीय शिव सिंह भी उनसे इत्तफाक रखते हैं। कहते हैं, वोट किसी को भी दे दो, जीतने के बाद कोई नहीं पलटता। पिछले साल सांसद निधि से बनी पानी की टंकी को दिखाते हुए कहते हैं, जब से बनी है सूखी ही खड़ी है।
पांच सालों में सांसद एक बार भी गांव में नहीं आईं। नानऊ से लगभग 60 किमी दूर खेरागढ़ विधानसभा क्षेत्र के गांव ‘होती का नगला’ के पुराने वोटर भी चुप हैं।
वह हर रोज प्रचार के लिए आ रहे प्रत्याशियों के काफिले तो देखते हैं लेकिन किसी गुबार में बंधकर नहीं रह पा रहे।
युवाओं पर मोदी प्रभाव
वैसे यह क्षेत्र विधानसभा या लोकसभा चुनाव में ब्राह्मण प्रत्याशियों के मुफीद साबित होता रहा है। मगर, इस क्षेत्र के मिश्रित जाति की आबादी वाले चीत और सोन गांव के युवा मोदी की लहर में बह रहे हैं।
फतेहाबाद और बाह विधानसभा क्षेत्र में राजा अरिदमन सिंह की अच्छी पकड़ मानी जाती है। वह अपनी पत्नी को चुनाव जिताने के लिए कई महीनों से एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।
अमर सिंह भी इनके किले को भेदने में जुटे हुए हैं। खेरागढ़ के कुछ गांवों के अलावा तांतपुर और जगनेर में बसपा अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए है।
भले यहां भी स्थितियां बदली हैं लेकिन ‘नीला आसमान’ अब भी यहां अपनी बांहें फैलाए खड़ा है।
ठाकुर मतदाताओं पर नजर
सीकरी में दो ठाकुर प्रत्याशी पक्षालिका सिंह और अमर सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों की ही नजर ठाकुर वोटरों पर है।
सीकरी, शमशाबाद, फतेहाबाद, बाह क्षेत्र में बहुत से ठाकुरों के गांव हैं। कहा जाता है कि ठाकुर वोटर कम ही बंटते हैं। इस बार ठाकुरों का ऊंट कौन सी करवट लेगा, इस पर अभी चुप्पी है।
मगौरा निवासी जनक सिंह कहते हैं, ठाकुर अभी अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं। वह कहते हैं, बिरादरी अंतिम समय में फैसला लेगी।
जाट वोटों में बिखराव
इस बार जाट एकजुट नहीं दिख रहे। एक तरफ उनकी परंपरागत पार्टी रालोद है तो दूसरी तरफ उनमें मजबूत पैठ वाले चौधरी बाबू लाल।
ऐसे में जाट बिखरा हुआ दिखाई दे रहा है। इन दोनों के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय निवासी अजय सिंह के सपा को समर्थन से भी जाटों का तीसरा केंद्र बनता दिख रहा है।
जाट बिरादरी का बड़ा गांव अघुवापुरा निवासी अमरपाल सिंह मानते हैं कि इस बार जाट बंटा हुआ है। एक-दो दिन के बाद ही जाट अपना रुख साफ करेंगे।
अमर सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर
अमर सिंह की बॉलीवुड में अलग पहचान है। फिल्म अभिनेत्री श्रीदेवी, जयाप्रदा और डिंपल कपाड़िया के रोड शो में उमड़ी भीड़ से अमर सिंह को काफी ऑक्सीजन मिली है लेकिन इस भीड़ में कितने लोग वोट में तब्दील हो पाते हैं, यह अलग सवाल है।
दूसरे चुनाव में उलझी सीकरी
फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट 2009 में ही बनी थी। पहले ही चुनाव से इस सीट पर रोचक मुकाबला रहा है।
आगरा से सांसद रहे सिने स्टार राज बब्बर को बसपा प्रत्याशी सीमा उपाध्याय ने अपने पहले ही चुनाव में शिकस्त दे दी थी। मगर, इस बार समीकरण काफी उलझे हुए हैं।