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ग्राउंड रिपोर्ट बिल्हौर : पुराने अखाड़े में नए खिलाड़ी, सारे उम्मीदवार पहली बार विधानसभा चुनाव मैदान में

Thu, 10 Feb 2022 03:50 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव पंकज प्रसून, अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर

सार

कानपुर में बिल्हौर (सुरक्षित) विधानसभा सीट से विधायक भगवती प्रसाद सागर के टिकट कटने के डर से सपा का दामन थामने के बाद इस बार यहां दिलचस्प संग्राम देखने को मिल रहा है।
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मैदान में... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर में बिल्हौर (सुरक्षित) विधानसभा सीट से विधायक भगवती प्रसाद सागर के टिकट कटने के डर से सपा का दामन थामने के बाद इस बार यहां दिलचस्प संग्राम देखने को मिल रहा है। इस सीट पर सभी प्रमुख दलों ने नए चेहरे मैदान में उतारे हैं। भाजपा ने यहां पर 2017 में दिवाकर बिरादरी के प्रत्याशी को टिकट दिया था, इस बार सोनकर बिरादरी के प्रत्याशी को। भाजपा की तरफ  से प्रत्याशी बनाए गए मोहित उर्फ  राहुल बच्चा सोनकर के पिता काला बच्चा सोनकर भी एक बार यहां से चुनाव लड़े थे। बाद में उनकी हत्या हो गई थी। पार्टी इसी संवेदना को भुनाने के लिए उनके बेटे को मैदान में ले आई है। हालांकि, सपा, बसपा और कांग्रेस ने यहां से महिलाओं को मैदान में उतारा है। बसपा से मधु गौतम का बिल्हौर में मायका है। इनके पति वर्तमान में हाथरस में एसडीएम के पद पर तैनात हैं। इसी तरह सपा ने रचना सिंह गौतम को टिकट दिया है। रचना समाजसेवी के रूप में क्षेत्र में चर्चित हैं। जबकि कांग्रेस से पार्टी की जिलाध्यक्ष रहीं ऊषा रानी कोरी चुनावी मैदान में हैं। 

विधानसभा चुनाव में नए होने की वजह से इन सभी प्रत्याशियों को खुद को मतदाताओं के बीच साबित करना है। यही वजह है कि प्रत्याशियों से ज्यादा राजनीतिक दलों ने यहां पर चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी संभाल रखी है। सुरक्षित सीट पर दलितों के वोटों को बंटवारा तो तय है, लेकिन जो प्रत्याशी सवर्णों और पिछड़ों में जितनी सेंध लगा पाएगा, उसी का बेड़ा पार होगा। भाजपा के लिए इस बार यह सीट उतनी आसान नहीं है, जितनी 2017 के विधानसभा चुनाव में थी। इन सीट पर प्रत्याशियों की बढ़त और कमजोर पड़ने का असर आसपास की घाटमपुर, रसूलाबाद सुरक्षित सीटों पर भी पड़ेगा।

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बिल्हौर की सशक्त रही है सियासी पृष्ठभूमि : ग्रामीण परिवेश वाली इस सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि काफी सशक्त रही है। 1957 से लेकर 1962 तक यहां पर कांग्रेस का सिक्का चला। इसके बाद सोशलिस्ट पार्टी, भारतीय क्रांतिदल, जनता पार्टी, जनतादल के प्रत्याशी 1991 तक जीतते रहे। 1993 में पहली बार समाजवादी पार्टी का यहां से खाता खुला। फिर 2012 तक सपा और बसपा के बीच सीटें बदलती रहीं। 2017 में यहां से भाजपा के टिकट से बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे भगवती प्रसाद सागर विधायक बने।

वोटों का गणित

  • एससी  1.41 लाख
  • कुर्मी  45 हजार
  • पाल  33 हजार
  • यादव  30 हजार
  • लोधी  20 हजार
  • ब्राह्मण 45 हजार
  • क्षत्रिय  42 हजार
  • मुस्लिम  30 हजार
  • अन्य  64 हजार


2017 का चुनाव परिणाम

  • भगवती प्रसाद सागर, भाजपा 1,02,326
  • कमलेश चंद्र दिवाकर, बसपा 71,160
  • शिव कुमार बेरिया, सपा 60,023
  • नरपत सिंह, रालोद 1239

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एक मिथक यह भी  हमेशा बाहरी प्रत्याशी ही बने यहां के अगुवा
बिल्हौर विधानसभा शुरू से ही सुरक्षित सीट रहने के कारण लगभग सभी सियासी दलों ने यहां बाहरी प्रत्याशी उतारे। बिल्हौर विधानसभा से मोतीलाल देहलवी सबसे पहले सोशलिस्ट पार्टी से वर्ष 1967, 1969 में चुने गए। इसके अलावा इस सीट से शिवकुमार बेरिया तीन बार, मुरलीधर कुरील, भगवती सागर दो बार विधायक चुने जा चुके हैं। इसी तरह अरुणा कोरी, कमलेश चंद्र, हनुमान प्रसाद कुरील, बृजरानी देवी को एक-एक बार बिल्हौर सीट से विधायक बनने का मौका मिला है। इस बार के चुनाव में कांग्रेस, सपा और बसपा के प्रत्याशी बिल्हौर के रहने वाले हैं, जबकि भाजपा प्रत्याशी का ताल्लुक कानपुर शहर से है।

 

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