सीएम योगी ने कहा, किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए उन्हें पशुपालन व दूसरे कृषि कार्यों से जोड़ा जाना आवश्यक है। गुजरात में कृषि और पशुपालन के तालमेल से किसानों में खुशहाली आई है। प्रदेश में भी इस कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है। बनास डेयरी द्वारा गोबर से सीएनजी बनाने का कार्य किया जा रहा है। इस पद्धति को अपनाकर प्रदेश में भी किसानों के जीवन में खुशहाली लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहले चरण में प्रत्येक मण्डल में 1 डेयरी, दूसरे चरण में 2 जनपदों में 1 डेयरी तथा अंतिम चरण में प्रत्येक जिले में 1 डेयरी की स्थापना के लिए कार्य कर रही है। इससे युवा आर्थिक रूप से स्वावलंबी व आत्मनिर्भर बनेंगे।
बोनस के रूप में दिए 30 करोड़
मुख्यमंत्री ने कहा कि बनास डेयरी एशिया की सबसे बड़ी सहकारी डेयरी होने के साथ ही, अमूल की सबसे बड़ी सदस्य है। उन्होंने कहा कि बनास डेयरी ने लगभग 30 करोड़ रुपये, दुग्ध भावांतर (बोनस) के रूप में किसानों को अतिरिक्त रूप से देना तय किया है। यह कुल खरीद का 4.41 प्रतिशत है। यह धनराशि बनास डेयरी द्वारा सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा रही है।
यूपी में हर माह 60 करोड़ की दूध खरीद: चौधरी
कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से बनास डेयरी, गुजरात के अध्यक्ष शंकर भाई चौधरी तथा गुजरात मिल्क मार्केटिंग फैडरेशन के एमडी आर0एस0 सोढ़ी ने भी संबोधित किया। चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं गो-पालक हैं। प्रधानमंत्री के किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को साकार करने के लिए उनका प्रयास प्रेरणादायक है। उन्होंने बताया कि बनास डेयरी वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश के किसानों से प्रतिमाह 14 करोड़ रुपये का दूध खरीदती थी। वर्तमान में यह खरीद 60 करोड़ रुपए प्रतिमाह की है।
गोपालन, संवर्धन के लिए 6 माह का पाठ्यक्रम
शंकर भाई चौधरी ने कहा कि बनास डेयरी द्वारा गो-पालन व गो-संवर्धन के लिए 6 माह का पाठ्यक्त्रस्म चलाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश से चयनित युवाओं को इस पाठ्यक्त्रस्म में रहने-खाने की निशुल्क सुविधा के साथ-साथ प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बनास डेयरी द्वारा प्रदेश में 2 नए दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। वाराणसी में गौ-आधारित सीएनजी प्लांट भी लगाया जाएगा।
प्रदेश में इस वर्ष एमएसएमई इकाइयों को 15 हजार करोड़ रुपये ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है। इसे हासिल करने के लिए बैंकों को ऋण वितरण में तेजी लाने को कहा गया है। लॉकडाउन से लेकर अब तक लगभग 80 प्रतिशत एमएसएमई इकाइयां 80 से 100 प्रतिशत क्षमता के साथ उत्पादन कर रही हैं। शेष इकाइयों को भी जल्द शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
यह जानकारी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. नवनीत सहगल ने भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से आयोजित एमएसएमई इकाइयों को ऋण उपलब्धता, पोस्ट कोविड की स्थितियों में ऋण वितरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के संबंध में आयोजित वेबिनार में दी।
सहगल ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम से प्रदेश की अधिक से अधिक इकाइयों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है। अन्य प्रदेशों की मुकाबले यूपी में एमएसएमई इकाइयों की वृद्धि अच्छी है। एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत सभी जिलों में क्लस्टर चिह्नित किए जा चुके हैं। स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) से जुड़े प्रत्येक बैंक को एक या दो ओडीओपी उत्पाद को चुनकर उन्हें ऋण देने के सार्थक प्रयास करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई इकाइयां कुछ कारणों से आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत क्रेडिट सुविधाओं से वंचित हैं। ऐसी इकाइयों की सूची उपलब्ध कराई जाए ताकि संवाद कर समस्याओं का समाधान किया जा सके। उद्यमियों को दिया जाने वाला उचित और त्वरित ऋण एनपीए को कम करने में भी मदद करेगा। उन्होंने एसएलबीसी की सुविधा के लिए ओडीओपी सेल स्थापित करने का आश्वासन भी दिया। वेबिनार में एमएसएमई सेक्टर के लिए क्रेडिट प्रवाह को बनाये रखने, इकाइयों के पुनरुद्धार के लिए फ्रेम वर्क, वन टाइम रिस्ट्रक्चरिंग स्कीम, क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट फंड स्कीम सहित तमाम बिंदुओं पर चर्चा की गई।