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Lucknow News: श्रीकृष्ण से विवेकानंद तक, महानाट्य ने दिया कर्म और राष्ट्रभक्ति का संदेश

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महानाट्य ने दिया कर्म और राष्ट्रभक्ति का संदेश
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लखनऊ। कभी नटखट कान्हा की माखन चोरी पर मुस्कान बिखरी, तो अगले ही पल कुरुक्षेत्र में गीता का अमर संदेश गूंज उठा। अंत में स्वामी विवेकानंद के प्रेरक विचारों ने पूरा माहौल राष्ट्रभक्ति से भर दिया। भारतेंदु नाट्य अकादमी के राज बिसारिया प्रेक्षागृह में रविवार की शाम मंचित महानाट्य ''कर्मण्येवाधिकारस्ते: मुरली से मातृभूमि तक'' ने दर्शकों को अध्यात्म, संस्कृति और देशभक्ति की अनोखी यात्रा कराई।
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ग्रीष्मकालीन बाल रंग कार्यशाला के समापन पर गुजरात के रंगनिर्देशक वॉल्टर पीटर के निर्देशन और डॉ. सुमित श्रीवास्तव के संयोजन में 100 से अधिक बच्चों ने शानदार अभिनय किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक रहे।
नाटक में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, कंस वध और अर्जुन को दिए गए ''कर्मण्येवाधिकारस्ते'' के संदेश को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। 11 कृष्ण और 11 राधा की मनोहारी प्रस्तुति विशेष आकर्षण रही। स्वामी विवेकानंद के चरित्र ने यह संदेश दिया कि गीता की सीख आज भी समाज और राष्ट्र को सही दिशा देती है। अर्जुन की भूमिका श्री श्रीवास्तव, दुआ अजीम, दानिया अजीम, मंजरी चंद्रा, आद्या शुक्ला, दिविजा पाहवा, अवनी, एलेक्स बिश्नोई और यथार्थ सिंह कारकी सहित अनेक बाल कलाकारों ने निभाई।

महानाट्य ने दिया कर्म और राष्ट्रभक्ति का संदेश

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