अक्सर अपनी मांगे मनवाने के लिए प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ जाते हैं, कभी
आगजनी करते हैं तो कभी पथराव। अब लोगों ने नदी में डूबना शुरू कर दिया है।
पिछले दिनों बीपीएड प्रशिक्षित बेरोजगारों की जल समाधि के बाद ग्राम रोजगार सेवक भी इसी रास्ते पर उतर आए। नियमित व राज्य कर्मचारी का दर्जा मांग रहे ये रोजगार सेवकों को उम्मीद है कि उनकी ये तरकीब सरकार पर असर डालेगी। हालांकि सरकार ग्राम रोजगार सेवकों को आश्वासन के अलावा कुछ नहीं दे पा रही।
शुक्रवार को सत्याग्रह के ऐलान के साथ एक दर्जन ग्राम सेवक गोमती नदी में छलांग लगा जल सत्याग्रह शुरू किया। लेकिन प्रशासन ने एक फिर ग्राम रोजगार सेवकों को मनाते हुए उन्हें सोमवार तक वार्ता का आश्वासन दिया है।
शुक्रवार को सुबह से लक्ष्मण मेला मैदान में अनिश्चित कालीन धरने पर डटे ग्राम रोजगार सेवकों ने दोपहर में गोमा घाट पर जल सत्याग्रह शुरू करने को लेकर तिरंगा लेकर छलांग लगाने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने रोक लिया। इससे नाराज एक दर्जन ग्राम रोजगार सेवक पुलिस को चकमा देकर गोमती नदी में कूद गए और नारेबाजी शुरू कर दी।
इस दौरान जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन ने ग्राम रोजगार सेवकों को मानमनौव्वल कर बाहर निकाला और आश्वासन दिया कि सपा प्रमुख के जन्म दिन के बाद सोमवार को मुख्यमंत्री से वार्ता कराई जाएगी इसके बाद जल सत्याग्रह कर नदी में कूदे ग्राम सेवक बाहर निकल आए।