प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में स्नातक प्रथम व स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को बिना परीक्षा के अगली कक्षा में प्रोन्नत किया जाएगा। वहीं स्नातक द्वितीय वर्ष, अंतिम वर्ष और स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षाएं अगस्त के मध्य तक कराई जाएगी। उच्च शिक्षण संस्थानों में 13 सितंबर से शैक्षिक सत्र 2021-22 शुरू किया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने मंगलवार को उच्च शिक्षण संस्थानों की परीक्षा की गाइड लाइन जारी करते हुए प्रायोगिक परीक्षाएं नहीं कराने की घोषणा की। प्रायोगिक परीक्षा के अंकों का निर्धारण लिखित परीक्षा के अंकों के आधार पर होगा जबकि मौखिक परीक्षा ऑनलाइन ली जा सकेगी। परीक्षा की अवधि को तीन से घटाकर डेढ़ घंटे किया गया है। विद्यार्थियों को प्रश्न पत्र में 50 प्रतिशत प्रश्नों को ही हल करना होगा। 31 अगस्त तक परीक्षा परिणाम घोषित किया जाएगा।
स्नातक वार्षिक परीक्षा के लिए यह रहेगी व्यवस्था
- जिन विश्वविद्यालयों में स्नातक प्रथम वर्ष की परीक्षा नहीं हुई है वहां पर विद्यार्थियों को बिना परीक्षा के द्वितीय वर्ष में प्रोन्नत किया जाएगा। उन्हें वर्ष 2022 में होने वाली स्नातक द्वितीय वर्ष की परीक्षा के प्राप्तांक के आधार पर प्रथम वर्ष के परिणाम दिए जाएंगे।
- ऐसे विश्वविद्यालय जहां पर 2020 में स्नातक प्रथम वर्ष की परीक्षा हो चुकी थी। वहां पर द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को स्नातक प्रथम वर्ष के अंकों के आधार पर द्वितीय वर्ष के अंक देकर स्नातक तृृतीय वर्ष में प्रोन्नत किया जाएगा।
- ऐसे विश्वविद्यालय जहां पर 2020 में स्नातक प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को बिना परीक्षा के द्वितीय वर्ष में प्रोन्नत किया गया था। वहां पर 2021 में स्नातक द्वितीय वर्ष की परीक्षा कराई जाएगी, द्वितीय वर्ष के परिणाम के आधार पर ही विद्यार्थियों को स्नातक तृतीय वर्ष में प्रोन्नत किया जाएगा।
- स्नातक तृतीय (अंतिम) वर्ष की परीक्षाएं कराई जाएगी।
स्नातकोत्तर परीक्षा के लिए यह रहेगी व्यवस्था
- स्नातकोत्तर पूर्वार्द्ध (प्रथम वर्ष) के विद्यार्थियों को बिना परीक्षा केउत्तरार्द्ध (अंतिम वर्ष) में प्रोन्नत किया जाएगा। 2022 में होने वाली स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष की परीक्षा के अंकों के आधार पर उनके पूर्वार्द्ध के अंक निर्धारित किए जाएंगे।
- स्नातकोत्तर उत्तरार्द्ध (अंतिम वर्ष) की परीक्षाएं आयोजित की जाएगी।
ऑनलाइन परीक्षा भी करा सकते हैं विश्वविद्यालय
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि विश्वविद्यालय किसी पाठ्यक्रम विशेष की ऑनलाइन वार्षिक परीक्षा भी करा सकते है। इसके लिए उन्हें समक्ष प्राधिकारी से अनुमति लेनी होगी। उन्होंने बताया कि सभी विश्वविद्यालयों को अगस्त के मध्य तक वार्षिक परीक्षाएं आयोजित करानी होगी। परीक्षा की तिथि और कार्यक्रम का निर्धारण विश्वविद्यालय अपने स्तर से कर सकेंगे। परीक्षा प्रणाली का सरलीकरण विश्वविद्यालय स्तर से किया जाएगा। विश्वविद्यालय एक ही विषय के सभी प्रश्न पत्रों को शामिल करते हुए एक ही प्रश्न पत्र बनाने पर विचार करने के निर्देश दिए है। विश्वविद्यालयों को मौजूदा परिस्थिति और उनकी तैयारी के मद्देनजर बहुविकल्पीय, ओएमआर शीट और विस्तृत उत्तरीय प्रश्न पत्र के आधार पर परीक्षा कराने के निर्देश दिए है।
विशेष परीक्षा करानी होगी
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि यदि कोरोना संक्रमित होने के कारण कोई विद्यार्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो पाते हैं तो उन विद्यार्थियों को उस पाठ्यक्रम या प्रश्न पत्र की विशेष परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि विशेष परीक्षा का आयोजन विश्वविद्यालय अपनी सुविधा के अनुसार करा सकते है। विशेष परीक्षा की व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2020-21 में केवल एक बार लागू होगी।
परिणाम सुधारने का मौका मिलेगा
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि यदि कोई विद्यार्थी परीक्षा परिणाम से संतुष्ट नहीं है तो उन्हें 2022 मेंहोने वाले बैक पेपर परीक्षा या 2022-23 में होने वाली वार्षिक/सेमेस्टर परीक्षा में शामिल होकर परिणाम सुधारने का मौका दिया जाएगा।
स्नातक एवं स्नातकोत्तर अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा कराई जाएगी
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा कराई जाएगी। यदि विश्वविद्यालयों में स्नातक पंचम और स्नातकोत्तर तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा नहीं कराई गई है तो अंतिम सेमेस्टर में प्राप्त अंकों के आधार पर पूर्व सेमेस्टर के अंक निर्धारित किए जाएंगे। जहां पर विषम और सम सेमेस्टर की परीक्षा नहींहुई वहां पर मिड टर्म / आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर विषम एवं सम सेमेस्टर के अंक निर्धारित कर परिणाम जारी किया जाएगा।
जिन विश्वविद्यालयों में स्नातक प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा हो चुकी है। वहां द्वितीय और चतुर्थ सेमेस्टर के अंक प्रथम व द्वितीय सेमेस्टर में मिले प्राप्तांक के आधार पर निर्धारित किए जाएंगे। जहां स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा हो चुकी है वहां द्वितीय सेमेस्टर के अंक प्रथम व तृतीय सेमेस्टर के अंकों के आधार या मिड टर्म आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर निर्धारित किए जा सकते है।