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मात्र दो घंटे में राज्यपाल ने लौटाई लोकायुक्त की फाइल

Sat, 08 Aug 2015 01:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रदेश के नए लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर यूपी सरकार ने शुक्रवार को जितनी तेजी दिखाई, राजभवन ने भी उतनी ही तेजी से जवाब दिया। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्यपाल राम नाईक द्वारा मांगी गई सूचनाओं के साथ लोकायुक्त की नियुक्ति वाली फाइल दोपहर दो बजे राजभवन भेजी।
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गवर्नर ने इसका तत्काल परीक्षण करवाया और शाम 4 बजे फाइल एक बार फिर मुख्यमंत्री को लौटा दी। कहा, लोकायुक्त के चयन की प्रक्रिया उ.प्र. लोक आयुक्त एवं उप लोक आयुक्त अधिनियम 1975 की धारा-3 के प्रावधानों के तहत पूरी नहीं की गई है।

साथ ही, यह भी कहा कि प्रावधानों के अनुसार लोकायुक्त चयन के लिए चीफ जस्टिस व नेता प्रतिपक्ष के साथ परामर्श की प्रक्रिया पूरी करें और सभी अभिलेखों केसाथ नए लोकायुक्त के नाम की संस्तुति करते हुए फाइल जल्द से जल्द भेजी जाए।
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इस बार क्यों लौटाई फाइल
- राजभवन के सूत्रों के अनुसार दोबारा भेजी गई फाइल के परीक्षण में पाया गया कि लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार मुख्यमंत्री, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा विधानसभा के नेता विपक्ष के साथ नए लोकायुक्त के चयन पर परामर्श की प्रक्रिया विधि अनुसार पूरी नहीं हुई है।
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यह भी हैं कारण

- सूत्रों के अनुसार राज्यपाल ने यह जानकारी भी मांगी है कि चीफ जस्टिस ने नए लोकायुक्त के नाम पर किस वजह से आपत्ति जताई थी। गौरतलब है कि मुख्य न्यायाधीश ने सीएम को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि नए लोकायुक्त के चयन के लिए उपयुक्त नामों का एक पैनल तैयार करके भेजें। उक्त पैनल में से लोकायुक्त का चयन करने के लिए तीनों सदस्यों की बैठक बुलाई जाए। परंतु न तो ऐसा कोई पैनल तैयार किया गया और न ही कभी इसके लिए विचार-विमर्श किया गया।

अब कानूनी सलाह लेगी सरकार
राजभवन द्वारा एक बार फिर फाइल लौटा दिए जाने से जस्टिस रवींद्र सिंह को लोकायुक्त नियुक्त करने की सरकार की कोशिशों को तगड़ा झटका लगा है। जानकारों का कहना है कि सरकार अब नए सिरे से कानूनी राय-सलाह के बाद अगला कदम तय करेग्री।

राजभवन-सरकार आमने सामने
लोकायुक्त पद पर जस्टिस रवींद्र सिंह की नियुक्ति के लिए सरकार ने कैबिनेट से प्रस्ताव पास कराकर बुधवार को फाइल राज्यपाल के पास भेजी थी।

बृहस्पतिवार को राज्यपाल ने लोकायुक्त की नियुक्ति के संबंध में नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस के साथ हुए पत्राचार का ब्यौरा तलब करते हुए फाइल मुख्यमंत्री को लौटा दी थी। सरकार ने शुक्रवार को फिर फाइल भेजकर जस्टिस रवींद्र की नियुक्ति पर मंजूरी का अनुरोध किया तो गवर्नर ने फाइल फिर लौटा दी।
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