प्रदेश के नए लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर यूपी सरकार ने शुक्रवार को जितनी तेजी दिखाई, राजभवन ने भी उतनी ही तेजी से जवाब दिया। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्यपाल राम नाईक द्वारा मांगी गई सूचनाओं के साथ लोकायुक्त की नियुक्ति वाली फाइल दोपहर दो बजे राजभवन भेजी।
गवर्नर ने इसका तत्काल परीक्षण करवाया और शाम 4 बजे फाइल एक बार फिर मुख्यमंत्री को लौटा दी। कहा, लोकायुक्त के चयन की प्रक्रिया उ.प्र. लोक आयुक्त एवं उप लोक आयुक्त अधिनियम 1975 की धारा-3 के प्रावधानों के तहत पूरी नहीं की गई है।
साथ ही, यह भी कहा कि प्रावधानों के अनुसार लोकायुक्त चयन के लिए चीफ जस्टिस व नेता प्रतिपक्ष के साथ परामर्श की प्रक्रिया पूरी करें और सभी अभिलेखों केसाथ नए लोकायुक्त के नाम की संस्तुति करते हुए फाइल जल्द से जल्द भेजी जाए।
इस बार क्यों लौटाई फाइल
- राजभवन के सूत्रों के अनुसार दोबारा भेजी गई फाइल के परीक्षण में पाया गया कि लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार मुख्यमंत्री, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा विधानसभा के नेता विपक्ष के साथ नए लोकायुक्त के चयन पर परामर्श की प्रक्रिया विधि अनुसार पूरी नहीं हुई है।