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एक हजार के खून पर सात हजार का मोटा मुनाफा

Sat, 08 Aug 2015 12:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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कोहली पैथोलॉजी में मासूम बच्चों के खून के सहारे डॉक्टर जो गोरखधंधा चला रहे थे उसमें उन्हें मोटा मुनाफा हो रहा था। ब्लड बैंक में छापेमारी करने पहुंची टीम को पता चला कि ब्लड बैंक में बिना जरूरत के रक्तदान करने और कराने वालों पर एक हजार रुपये खर्च किए जाते थे।
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इसके बाद उस ब्लड की पूरी जांच करने के बाद छह से आठ हजार का बेचा जाता था। लाल खून के काले कारोबार के इस धंधे से कोहली ब्लड बैंक के मालिक, डॉक्टर और दूसरे कर्मचारी रोजाना एक लाख से अधिक का काला धंधा करते थे।

कोहली ब्लड बैंक दलालों के भरोसे था। स्थानीय लोगों की मानें तो ब्लड बैंक में हर समय छोटे बच्चे पहुंचते थे पर मार्केट के बीच में होने की वजह से किसी को ऐसा पता ही नहीं चला कि बच्चों को बहला फुसलाकर खून का काला कारोबार किया जा रहा है।
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जानकारी के मुताबिक ब्लड बैंक मोटा मुनाफा कमाने का जरिया था। बच्चों को रक्तदान के लिए लाने वाले दलालों को एक हजार रुपये दिया जाता था जिसमें पांच सौ रुपये रक्तदान करने वाले और 500 रुपये बच्चे को ब्लड बैंक तक लाने वाले को। यह ब्लड ऐसे मरीजों को जिनके पास डोनर नहीं होते थे सात से आठ हजार रुपये में बेचा जाता था।

हर रोज होता था लगभग एक लाख का कारोबार

ब्लड बैंक से एक दिन में 17 यूनिट ब्लड की सप्लाई से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कम से कम एक लाख रुपये का कारोबार हर दिन होता था।

जिस मरीज के पास डोनर होता था उससे भी ब्लड बैंक में कम से कम तीन से चार हजार रुपये डोनेट करने के बाद वसूले जाते थे। कोई तीमारदार पैसे देने में असमर्थता जताता था तो उसे सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंक का रास्ता दिखा दिया जाता था।

स्मैकियों का भी रक्त लेते थे
पैसा कमाने की चाहत में कोहली ब्लड बैंक में स्मैकियों का खून निकालने में भी देर नहीं की जाती थी।

ब्लड बैंक के सामने स्थित एक दुकानदार की मानें तो दिनभर में कम से कम पांच से छह स्मैकिए आते थे जो नशे में चूर रहते थे। कई बार रक्त निकालने के बाद वो ब्लड बैंक के बाहर ही गिर गए। कई बार पैसे के लेनेदेन को लेकर आपसी नोकझोंक भी हुई।
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दलालों का रैकेट करता था काम

कोहली ब्लड बैंक को चलाने के लिए दलालों का पूरा रैकेट काम करता था। कमीशन का लालच देकर ब्लड बैंक के डॉक्टर और कर्मचारियों ने ऐसा रैकेट बना दिया था कि हर दिन आठ से दस यूनिट रक्त कलेक्ट कर लिया जाता था।

दलाल चौक के स्कूल कॉलेज और इलाके में रहने वाले ऐसे बच्चों और युवकों को झांसे में लेते थे जिनको पैसे की जरूरत होती थी।

निगेटिव ग्रुप सबसे महंगा
कोहली ब्लड बैंक में चला रहे काले कारोबार में सबसे अधिक डिमांड निगेटिव ग्रुप की होती थी। निगेटिव ग्रुप वाले डोनर को भी डॉक्टर और कर्मचारी पांच सौ रुपये ही देते थे लेकिन जिस मरीज को निगेटिव ग्रुप की जरूरत होती थी उससे मुंह मांगी रकम वसूली जाती थी।

इस ग्रुप में बी-निगेटिव, ओ-निगेटिव, ए-निगेटिव, एबी-निगेटिव समेत अन्य ब्लड ग्रुप शामिल हैं जिसके लिए इमरजेंसी केस होने पर दस से बारह हजार रुपए की वसूली होती थी।
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