नाईक ने कहा, स्ववित्तपोषित कार्यक्रमों के तहत होने वाली नियुक्तियों से संबंधित सेवा शर्तों को विवि अधिनियम और परिनियमावली का अंग बनाया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विनियमों के अंगीकरण, सभी कार्य ऑनलाइन करने, नैक मूल्यांकन अनिवार्य करने, कार्य परिषद के सदस्यों का शिक्षा क्षेत्र से अनिवार्य रूप से संबंध होने और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के साथ अनुबंध स्थापित किए जाने की संस्तुति भी की गई है। यह पूछे जाने पर राजभवन की तमाम सिफारिशें सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल रखी हैं, राज्यपाल ने कहा कि तमाम कारणों से निर्णय लेने में समय लगता है।
विवि अधिनियम में संशोधनों की जरूरत
राज्यपाल ने कहा कि राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1973 की कई धाराओं में एकरूपता न होने के कारण इसमें संशोधन के लिए उनके विधिक सलाहकार एसएस उपाध्याय की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। इसकी रिपोर्ट भी सरकार के पास भेजी गई है।
फीस निर्धारण के लिए बने कानून
राज्यपाल ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय को मान्यता मिलने की प्रत्याशा में कोई पाठ्यक्रम शुरू नहीं करना चाहिए। निजी विश्वविद्यालयों द्वारा मनमानी फीस वसूलने पर अंकुश लगाने के लिए नियम-कानून बनने चाहिए।