राज्यपाल ने कहा कि शिक्षकों में बच्चों के प्रति एक मां का भाव होना चाहिए। बच्चों के साथ मां की भूमिका निभाएंगे तो ही बच्चों के अध्ययन और शिक्षकों के अध्यापन का उद्देश्य पूरा होगा। इससे बच्चों का बौद्धिक और मानसिक विकास तेज होगा। बच्चे जितने प्रबुद्ध और सशक्त होंगे, देश उतना ही अधिक शक्तिशाली होगा। यह तभी संभव है जब बुनियादी शिक्षा सुदृढ़ हो।
राज्यपाल ने कहा कि परिषदीय स्कूलों में आने वाले बच्चे संघर्ष कर और कठिन परिस्थितियों में स्कूल आते हैं। इन बच्चों को निजी स्कूल के बच्चों के समान न तो सुख सुविधाएं मिलती है, न ही विलासिता होती है।
शिक्षकों को चाहिए कि वे इन बच्चों की पढ़ाई और सह-शैक्षणिक गतिविधियों पर ध्यान दें। उन्होंने स्कूलों में स्कूल-पुलिस कैडेट का भी गठन करने को कहा। गृह विभाग को इस संबंध में उन्होंने पत्र लिखा है।