प्रदेश में आवासीय योजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण करने के लिए लैंड पूलिंग योजना लागू की जाएगी। हालांकि इसके लिए सबसे पहले एक्ट बनाया जाएगा। इस एक्ट के बन जाने के बाद विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद व अन्य संस्थाएं इस योजना के तहत भूमि की व्यवस्था कर सकेंगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आवास एवं शहरी नियोजन को इससे संबंधित एक्ट बनाने और उसमें प्रक्रिया, नियम व शर्तें निर्धारित करने का निर्देश दिया है। सीएम ने एक्ट बनने के बाद पहले चरण में 25 एकड़ से अधिक जमीन लेकर लखनऊ सहित बड़े शहरों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के भी आदेश दिए हैं। साथ ही इस योजना के तहत किसानों की सहमति से ही भूमि अधिग्रहण करने को कहा है।
मुख्यमंत्री ने यह निर्देश सोमवार को आवास एवं शहरी नियोजन विभाग द्वारा लैंड पूलिंग योजना का प्रजेंटेशन देखने बाद दिया है। प्रमुख सचिव आवास नीतिन रमेश गोकर्ण ने प्रजेंटेशन दिखाते हुए मुख्यमंत्री को योजना के तहत किसानों से ली जाने वाली भूमि का अधिग्रहण की प्रक्रिया के बारे में बताया।
लैंड पूलिंग योजना में प्रस्तावित योजनाओं में मूलभूत सुविधाएं व जरूरी संसाधन जैसे सड़क, पार्क, खुले मैदान, ड्रेनेज सिस्टम की व्यवस्था करने के बाद बची करीब आधी जमीन में 50-50 प्रतिशत विकसित भूखंड किसान और विकास प्राधिकरण या अन्य विकास कार्य करा रही सरकारी संस्थाओं को दिए जाएंगे। पायलट प्रोजेक्ट के लिए जो न्यूनतम 25 एकड़ जमीन ली जाएगी, उसमें न्यूनतम 18 मीटर चौड़ी संपर्क मार्ग पर होना जरूरी होगा।
इसी तरह योजना के लिए भूमि का चयन तभी किया जाएगा, जब लैंड पूलिंग के लिए न्यूनतम 80 प्रतिशत भू-स्वामी सहभागिता के लिए अपनी सहमति दें। जो भू-स्वामी इसके लिए तैयार नहीं होगा। उन्हें भूमि समायोजन या ट्रांसफर ऑफ डवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) सर्टिफिकेट के विकल्प दिए जाएंगे।
इसके बाद भू-स्वामी को बदले में मिली जमीन या टीडीआर सर्टिफिकेट का उपयोग खुद की मर्जी से करने का अधिकार होगा। योजना के लिए चयन में सबसे पहले आवासीय भू-उपयोग वाली जमीनों को शामिल किया जाएगा। इसके बाद कृषि भू-उपयोग की जमीनों को लैंड पूलिंग से लिया जा सकेगा। इस मौके पर मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडेय, प्रमुख सचिव स्टांप और निबंधन हिमांशु कुमार, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल समेट अन्य अधिकारी मौजूद थे।