तात्कालिक रूप से बिजली दरों में कमी करने के मुद्दे से खुद को अलग करते हुए राज्य विद्युत नियामक आयोग ने गेंद सरकार के पाले में डाल दी है।
दरें कम करने के संबंध में आयोग ने अपनी तरफ से राय न देते हुए लाइसेंसधारियों (बिजली कंपनियों) की ओर से दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) व टैरिफ प्रस्ताव के विचाराधीन होने की बात कही है।
अब शासन को पावर कॉर्पोरेशन की रिपोर्ट का इंतजार है। जिसके बाद कोई फैसला किया जाएगा।
घरेलू बिजली दरों में कमी के लिए शासन ने 6 फरवरी को राज्य विद्युत नियामक आयोग और पावर कॉर्पोरेशन को पत्र भेजकर 9 फरवरी तक रिपोर्ट तलब की थी।
नियामक आयोग ने इस मामले से खुद को अलग रखते हुए दो टूक कह दिया है कि एआरआर व टैरिफ प्रस्ताव उसके विचाराधीन है।
दरें कम की जा सकती हैं या नहीं इस पर आयोग ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है। आयोग के सचिव अरुण कुमार श्रीवास्तव की ओर से ऊर्जा विभाग के अनुसचिव अजीत कुमार को जवाब भेजा गया है।
इसमें बिजली कंपनियों की ओर से दाखिल एआरआर व टैरिफ प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि दरों के निर्धारण का मामला विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के अनुसार विचाराधीन है।
दिलचस्प बात यह है कि जहां आयोग ने शासन को निर्धारित समयसीमा में जवाब भेज दिया है। वहीं पावर कॉर्पोरेशन अभी ऊहापोह में है और जवाब नहीं भेजा जा सका है।
सूत्रों का कहना है कि ऊर्जा विभाग को पावर कॉर्पोरेशन की रिपोर्ट का इंतजार है। बिजली दरों में कमी की जा सकती है या नहीं, यह अब कॉर्पोरेशन के रुख पर निर्भर करेगा।
कॉर्पोरेशन की रिपोर्ट मिलने के बाद ऊर्जा विभाग राज्य योजना आयोग और नियोजन विभाग की रिपोर्ट भेजेगा।
कॉर्पोरेशन बिजली दरों में कमी करने को तैयार होगा इसके आसार कम ही हैं। इसलिए अब शासन को ही रास्ता निकालना होगा।