सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश के प्रत्येक गांव में पुलिस भेजकर किसानों में डर पैदा करने की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि किसानों से बात करने के नाम पर उन्हें धमकाया जा रहा है। किसान नेताओं के साथ ही सपा नेताओं को भी घरों में नजरबंद किया जा रहा है।
अखिलेश यादव ने सोमवार को बयान में कहा कि गांवों में धान खरीद की रिपोर्ट बनाने के बहाने पुलिस को भेजा जा रहा जबकि जबकि धान की लूट हो चुकी है। सच्चाई यह है कि इसका उद्देश्य गांवों में डर पैदा करना है ताकि किसानों में भय पैदा करके आंदोलन से अलग रखा जा सके। उन्होंने कहा, ऐसा लगता है कि भाजपा का राजनीतिक नेतृत्व अक्षम हो गया है। कृषि कानून पर किसानों से अब पुलिस बात करेगी ? धान खरीद की कथित रिपोर्ट पुलिस इकट्ठा करेगी? उन्होंने कहा, पूरी ताकत झोंकने के बावजूद भाजपा नेतृत्व किसानों से संवाद नहीं कर पा रहा है। भाजपा का चूंकि किसान-खेती से कभी रिश्ता रहा नहीं इसलिए अन्नदाता का सम्मान करना उन्हें नहीं आता है। कारपोरेट दुनिया भाजपा की सरंक्षक है और भाजपा उनकी पोषक पार्टी है।
सपा अध्यक्ष ने कहा, भाजपा लाख झूठ बोले लेकिन किसान समझ गया है कि कृषि कानून वस्तुत: छलावा है। किसानों से जो भाजपा सरकार अपने किए गए एक भी वादे को पूरा नहीं कर सकी है, वह किसानों की जिंदगी में खुशहाली कहां से लाएगी। उसकी नीयत तो किसान की खेती छीनकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों और पूंजी घरानों को सौंप देने की है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भाजपा की जमीन खिसक रही है, वह और दमनकारी होती जा रही है। किसान जाग चुका है, वह भाजपा की साजिशों में अब फंसने वाला नहीं है। वह प्रदेश की राजनीति में बदलाव चाहता है।
चौथे दिन भी सपाइयों ने लगाईं चौपाल
सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि सोमवार को चौथे दिन भी समाजवादी किसान घेरा सभी जिलों में जारी रहा। गांवों में अलाव पर चौपाल लगाकर किसानों के बीच उनकी समस्याओं और भाजपा राज में उनके साथ होने वाले अन्याय पर खुलकर चर्चा की हो रही है। किसानों को सपा सरकार में किए गए कामों की भी जानकारी दी गइ र्है। सपा सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व मंत्रियों और पार्टी पदाधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। अब तक एक हजार से ज्यादा गांवों में यह किसान घेरा कार्यक्रम हो चुका है। उन्होंने कहा, समाजवादी किसान यात्रा और समाजवादी किसान घेरा कार्यक्रमों में लाखों की उपस्थिति दर्शाती है कि 2022 में विकास की साइकिल का दौड़ना तय है।