अधिकारी ने दावा किया कि प्रदेश सरकार ने केंद्रीय बजट पेश होने से पहले किसानों के लिए एक ‘किसान समर्थ योजना’ योजना तैयार की थी। इसमें युवा बेरोजगारों को 20 लाख रुपये तक अनुदान देकर किसान समर्थ केंद्र खोलकर स्वरोजगार उपलब्ध कराना था। इस तरह के 1000 केंद्र खोलने के प्रस्ताव थे। यहां से किसानों को किराए पर कृषि यंत्र मिलता, लेकिन केंद्रीय आम बजट में किसानों के अकाउंट में सीधे 6000 रुपये आर्थिक सहायता देने के एलान के बाद सरकार ने मन बदल दिया। राज्य ने पूरा फोकस आधी आबादी पर केंद्रित कर लिया। अंतिम समय पर ‘किसान समर्थ योजना’ ड्राप कर दी गई।
योजनाकारों का तर्क
हालांकि कन्या सुमंगला योजना बनाने में शामिल रहे वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी इसे चुनावी योजना कहने पर आपत्ति जताते हैं। वह कहते हैं कि केंद्र की योजना भी किसानों को समर्थ बनाने वाली है। ठीक चुनाव के पहले लाए जाने की वजह से उसे चुनावी नजरिए से देखने को लोग स्वतंत्र हैं। यह योजना न सिर्फ सत्ताधारी दल के संकल्प-पत्र में शामिल है बल्कि मुख्यमंत्री पहले बजट से ही इसका एलान करना चाहते थे। लेकिन, पहले बजट में 36 हजार करोड़ रुपये किसानों की कर्जमाफी के लिए रखने की वजह से नहीं लाई जा सकी।
दूसरे बजट में सातवें वेतन का एरियर व छूटे किसानों की कर्जमाफी पर केंद्रित रहा। इस बार नई योजना में सबसे पहले इसे ही रखने को कहा गया। वह कहते हैं कि कन्या सुमंगला योजना परिवारों में बेटी-बेटा के जन्म में भेदभाव की प्रवृत्ति पर बड़ा अंकुश लगाएगी। इससे न सिर्फ परिवार में बोझ मानकर बेटियों की भ्रूण हत्या करने के पाप रुकेंगे बल्कि जन्म से ही पढ़ाई व शादी की उम्र तक हर स्तर पर आर्थिक सहायता दिए जाने से बेटी को लेकर परिवारों की भावना बदलेगी। बेटियां समर्थ बनेंगी और आगे बढ़ेंगी। महिला सशक्तीकरण को लेकर सरकार की यह अनूठी पहल है।