बिल्डर की धोखाधड़ी से बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने बिल्डर के साथ ही खरीदार के भी अधिकार तय कर दिए हैं। इसके तहत ‘उप्र भू-संपदा (विनिमय और विकास) अधिनियम’ (यूपी रेरा) में रियल एस्टेट की परियोजनाओं का पंजीकरण कराने के समय ही ‘विक्रय अनुबंध’ (एग्रीमेंट फॉर सेल) जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है।
इस अनुबंध में खरीदी जाने वाली संपत्ति के बारे में पूरा ब्यौरा दर्ज करना जरूरी है। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग द्वारा तैयार ‘द उप्र रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंव डवलपमेंट) (एग्रीमेंट फॉर सेल रूल्स)’ को कैबिनेट ने बुधवार को मंजूरी दे दी।
फैसले के अनुसार बिल्डर और खरीदार के बीच जो अनुबंध किया जाएगा, उसमें फ्लैट या प्लॉट बुक करते समय प्रमोटर को उन सभी शर्तों का उल्लेख करना अनिवार्य होगा, जिनपर उसने बुकिंग की है। अनुबंध में प्रमोटर को यह भी बताना होगा कि प्रोजेक्ट से संबंधित भूमि पर उसका पूर्ण स्वामित्व है और सक्षम स्तर से यह परियोजना स्वीकृत है।
साथ ही संबंधित भूखंड पर किसी तरह का न कर्ज है और न ही किसी तरह का विवाद अदालत में लंबित है। परियोजना की भूमि, कंपनी, पार्टनरशिप फर्म का भी ब्यौरा देना होगा। कोई भी बिल्डर संपत्ति की कुल कीमत का 10 प्रतिशत से अधिक पंजीकरण शुल्क नहीं ले सकेगा।