पावर कॉर्पोरेशन सरकारी विभागों और गांवों के उपभोक्ताओं से बिजली बिल नहीं वसूल पा रहा है। इससे उसका घाटा बढ़ता जा रहा है। इससे उबरने के लिए ही ऊर्जा निगमों के निजीकरण के लिए जोर दिया रहा है। स्थिति यह है कि सरकारी विभागों को हर महीने सत्यापित बिजली बिल भेज कर जमा करने का अल्टीमेटम दिया जाता है। लेकिन विभाग इसे अनसुना कर रहे हैं।
सरकारी विभागों के अफसरों को बिजली बिल की रकम शासन से मिलती है, लेकिन वे इसे दूसरे मद में खर्च कर देते हैं और बिल को बढ़ाते रहते हैं। वर्तमान में मध्यांचल निगम में 69 सरकारी विभाग 565.62 करोड़ रुपए दबाए बैठे हैं। इनमें सबसे बड़ा बकाएदार प्राथमिक शिक्षा विभाग है जिस पर 212 करोड़ रुपये की देनदारी है जो सितंबर तक उपभोग की गई बिजली के बिल की है। दूसरे नंबर पर पुलिस विभाग और तीसरे पर पंचायती राज है।
डीएम-कमिश्नर कार्यालयों पर भी देनदारी
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में 19 जिले आते हैं इनमें लखनऊ, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर, शाहजहांपुर, बरेली, बदायूं, पीलीभीत, बाराबंकी, अयोध्या, अंबेडकर नगर, सुल्तानपुर, अमेठी, बहराइच, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती शामिल हैं। इन जिलों के डीएम-कमिश्नर कार्यालयों के बिल बकाया हैं। कई जिलों में तो डीएम व कमिश्नर आवास का भी बिल बकाया। लेकिन इंजीनियरों की हिम्मत नहीं है कि वे इनके कनेक्शन काट दें।
चार विभागों पर ही 7485 करोड़ बकाया
पावर कॉर्पोरेशन के चार विभागों पर 7485 करोड़ रुपये की बिजली बिल की रकम बकाया है। यह विभाग केंद्रीय स्तर (एक विभाग के सभी बिल एक ही जगह से) पर बिलों का भुगतान करते हैं। इनमें राजकीय नलकूप पंप नहर पर 3256 करोड़, स्थानीय निकाय पर 2062 करोड़, मार्ग प्रकाश व जलकल पर 2012 करोड़ और जल निगम की नदी प्रदूषण नियंत्रण परियोजना पर 155 करोड़ के बिल शामिल हैं।
जो बिल नहीं भरेगा, उसकी कटेगी बिजली
सरकारी उपभोक्ता हो या आम उपभोक्ता, अब जो बिल नहीं भरेगा उसकी बिजली कटेगी। गैर सरकारी बकाएदारों की बिजली काटने का सिलसिला शुरू हो चुका है। सरकारी विभागों के भी कनेक्शन काटने की तैयारी चल रही है।
- ब्रह्म पाल निदेशक (वाणिज्य) मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड लखनऊ
मध्यांचल के टॉप टेन कर्जदार विभाग
विभाग देनदारी (करोड़ में)
प्राथमिक शिक्षा 212
पुलिस 70.39
पंचायती राज 63.55
एलोपैथिक चिकित्सा 33.07
जिला प्रशासन 24.99
सार्वजनिक स्वास्थ्य 18
जल संस्थान 13.20
लोक निर्माण 12.68
सिंचाई अधिष्ठान 10.79
माध्यमिक शिक्षा 10.18