सूत्रों का कहना है कि चूंकि राजनाथ सिंह की सरकार के समय बनाए गए पिछड़ों में अति पिछड़ों को आरक्षण के फार्मूले पर न्यायालय में याचिका हो गई। संयोग से उसके बाद अभी तक प्रदेश में भाजपा की सरकार ही नहीं बनी।
अब जाकर भाजपा की सरकार बनी। पर, इन 14 वर्षों में आंकड़ों में फर्क आ गया है। इसीलिए सरकार ने ताजा आंकड़े जुटाने का फैसला किया है। आंकड़े सामने आने के बाद सरकार उस आधार पर अति पिछड़ों के आरक्षण पर आगे बढ़ेगी।
भाजपा के प्रदेश मंत्री अमरपाल मौर्य कहते हैं कि हमारी पार्टी जनसंघ के समय से ही सामाजिक समरसता पर काम करती रही है। सरकार की इस कमेटी का उद्देश्य भी सामाजिक समरसता और सामाजिक न्याय करना है ताकि आरक्षण का लाभ सभी को मिल सके। हमारी सरकार किसी का हक छीनने के पक्ष में नहीं है। पर, उन्हें देना जरूर चाहती है जिन्हें अभी तक उनका हिस्सा नहीं मिला है।
मोस्ट बैकवर्ड क्लासेज के अध्यक्ष शिवलाल साहू का कहना है कि मंडल कमीशन में एल. आर. नायक की संस्तुतियों को लागू किए बिना सामाजिक न्याय पूरा नहीं हो सकता। दुर्भाग्य से किसी सरकार ने अभी तक ईमानदारी से इसे लागू करने में रुचि नहीं ली।
इसी कारण, आरक्षण का लाभ कुछ जातियों तक सिमटकर रह गया। साहू के अनुसार, नायक ने पिछड़ों को मिलने वाले 27 प्रतिशत आरक्षण में 12 प्रतिशत आरक्षण खेतिहर जातियों मसलन यादव, कुर्मी, गूजर और जाट तथा 15 प्रतिशत परंपरागत पेशेवर जातियों उदाहरण के लिए लोहार, नाई, कहा, मल्लाह, बढ़ई, पाल, निषाद, मुराई जैसो को मिलना चाहिए। साहू कहते हैं कि जब तक अति पिछड़ी जातियों को कोई लाभ नहीं होगा।