फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चेतावनी पर चेतावनी लेकिन नहीं माने डीएम साहब, तब चला सीएम योगी का डंडा

Fri, 08 Jun 2018 01:04 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
dm of fatehpur and gonda - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ धान खरीद, अनाज वितरण, अवैध खनन रोकने जैसे प्रमुख मुद्दों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर अफसरों को बार-बार ठीक से काम की हिदायत देते रहे। मुख्य सचिव और विभागीय प्रमुख सचिव शासनादेश जारी कर निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन के आदेश थमाते रहे।

विज्ञापन


गोंडा और फतेहपुर से शिकायतें आने पर सरकार ने बड़े अफसरों को सुधरने की मोहलत देते हुए छोटे अफसरों पर कार्रवाई भी की। मुख्यमंत्री जिले में गए तो गड़बड़ियों वाले क्षेत्रों को इंगित कर सुधार के लिए चेताया, मगर जिले के आला अफसरों ने इस पर कान नहीं दिया।

राशन माफिया, खनन माफिया, बिचौलियों का धंधा बेधड़क चलता रहा। लोग परेशान रहे। अफसर अपनी कुर्सी बचाने के लिए स्थानीय प्रभावशाली नेताओं की जी-हुजूरी में जुटे रहे। उनकी मनमानी के आगे नतमस्तक तक हो गए। नतीजा ये हुआ कि अगली शिकायत जांच-पड़ताल में तस्दीक हुई तो मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों तक के निलंबन में हिचकिचाहट नहीं दिखाई।
विज्ञापन


दरअसल मुख्यमंत्री को पिछले साल अक्तूबर में गोंडा में बड़े पैमाने पर अवैध खनन की शिकायतें मिली थीं। डीएम जेबी सिंह ही थे। मुख्यमंत्री ने डीएम और तत्कालीन एसपी को चेतावनी दी और तीन थानाध्यक्षों व एक खान निरीक्षक को निलंबित कर दिया।

दो-दो तहसीलों के एसडीएम व सीओ के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू कराई। इतने सख्त एक्शन के बावजूद जिले में अवैध खनन नहीं रुका। जिले के जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री व शासन के अफसरों से मिलकर जिले में प्रशासनिक शिथिलता व विभिन्न योजनाओं व कार्यक्रमों में मनमानी की शिकायतें करते आ रहे थे। सरकारी अनाज की कालाबाजारी का मामला सामने आया तो सरकार ने सख्त कार्रवाई में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई।

इसी तरह पिछले साल दिसंबर में फतेहपुर में अवैध खनन व परिवहन की जानकारी सरकार को मिली। डीएम कुमार प्रशांत ही थे। शासन ने परगना अधिकारी, सीओ खागा, धाता के एसएचओ व खान अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।

अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई न किए जाने पर डीएम व एसपी से स्पष्टीकरण तलब हुआ, पर फतेहपुर से अवैध खनन की शिकायतें रुक नहीं रही थीं। सरकार को गेहूं खरीद में भी जिले में मनमानी की शिकायत मिली तो जांच के बाद निलंबित करने में देर नहीं लगाई।

गोंडा में मुख्यमंत्री की चेतावनी पर भी नहीं दिया ध्यान

मुख्यमंत्री 18 मई को गोंडा के मनकापुर गए थे। वहां की खुली जनसभा में खाद्यान्न घोटाले और अवैध खनन को लेकर जिले के अफसरों को आगाह किया, मगर अफसरों ने इसे भी हल्के में ही लिया। कोई कार्रवाई नजर नहीं आई। नवाबगंज में क्षेत्रीय विधायक ने सक्रियता दिखाकर सरकारी अनाज की कालाबाजारी पकड़वाई तो मामला संभाले नहीं संभला।
 
सांसद के घर के सामने स्कूल ढहाने में ढुलमुल रवैया भी भारी पड़ा
गोंडा के ही नवाबगंज में कैसरगंज सांसद के घर के सामने सरकारी प्राइमरी स्कूल ढहाए जाने के मामले में भी डीएम की ढुलमुल भूमिका की शिकायत मुख्यमंत्री से हुई थी। वहां के बीएसए को हटाए जाने के खिलाफ जिले के भाजपा अध्यक्ष पीयूष मिश्र व कई विधायकों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी और जिले में प्रशासनिक शिथिलता की शिकायत की थी। बीएसए का तबादला तो नहीं रुका लेकिन डीएम भी अपनी कुर्सी नहीं बचा पाए।
विज्ञापन

जातीय हिंसा में सस्पेंड हुए थे आईएएस एनपी सिंह

योगी सरकार ने सरकारी योजनाओं व प्रशासनिक कामकाज में शिथिलता पर इस तरह की पहली सख्त कार्रवाई की है। इसके पहले पिछले साल मई में सहारनपुर की जातीय हिंसा के बाद योगी ने सहारनपुर के तत्कालीन डीएम एनपी सिंह व एसएसपी एससी दुबे को सस्पेंड किया था।  
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें