राजधानी के विकास में बाधा बनीं अवैध कॉलोनियों पर एलडीए कार्रवाई नहीं कर रहा है। इससे नाराज शासन ने अब ऐसे अधिकारियों के नाम मांगे हैं जो अवैध निर्माण पर रोक लगाने के लिए जिम्मेदार हैं।
इससे प्राधिकरण में हड़कंप मचा हुआ है क्योंकि अवैध निर्माण के मामले में अब तक अधिकारी खुद को बचाते रहे हैं। ताजा उदाहरण नाका होटलों में आग के प्रकरण का है।
इसमें केवल इंजीनियरों और सुपरवाइजरों के नाम ही शासन को भेजे गए थे जबकि अधिकारियों के नाम इससे बाहर रखे गए थे।
आवास विभाग से आए पत्र में कहा गया है, 2018 में मुख्य सचिव ने एक आदेश दिया। इसमें अवैध कॉलोनियों के अलावा अनियोजित विकास और अवैध निर्माण पर कार्रवाई के लिए कहा गया।
इसमें इंजीनियरों के अलावा अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की गई थी। यह कार्रवाई यूपी नगर नियोजन और विकास अधिनियम 1973 की धारा 16, 26, 27, 28 में दिए गए प्रावधानों में होनी है।
विनियमित क्षेत्रों में यूपी निर्माण कार्य विनियम अधिनियम 1958 की धारा-10 में भी इसके लिए प्रावधान हैं। अब शासन ने पूछा है कि किन अधिकारियों को कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गई?
ऐसे अधिकारियों की सूचना प्राथमिकता पर उपलब्ध कराई जाए। इसके बाद सचिव ने प्राथमिकता पर यह सूचना शासन को भेजने के आदेश दिए हैं।
500 से अधिक अवैध कॉलोनियां बस चुकीं
लखनऊ में अभी तक 500 से अधिक अवैध कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं। इन पर कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति होती रहती है। अवैध कॉलोनियों में अब भी धड़ल्ले से निर्माण हो रहे हैं। पिछले दिनों कुछ कॉलोनियों पर कार्रवाई की गई, लेकिन इनकी संख्या दो दर्जन से भी कम हैं। इसमें सील और तोड़ने दोनों तरह की कार्रवाई शामिल है।