निजी मेडिकल कॉलेजों की मनमानी फीस पर सरकार लगाम लगाने जा रही है। सरकार अब इनकी फीस खुद तय करेगी। इसके लिए उसने इन कॉलेजों से प्रस्ताव मांगा है। साथ ही कॉलेजों से उनकी बैलेंसशीट व खर्चों का विवरण मांगा गया है।
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इसी के आधार पर सरकार कॉलेजों की फीस निर्धारित करेगी।सूबे में निजी क्षेत्र के 18 एमबीबीएस व 25 डेंटल कॉलेज हैं। अभी ये कॉलेज मनमाने ढंग से फीस वसूलते हैं। सरकार का इनकी फीस पर कोई नियंत्रण नहीं है लेकिन अब वह खुद इनकी फीस निर्धारित करेगी।
प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा की अध्यक्षता में फीस निर्धारण समिति का गठन भी हो गया है। इसमें महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा के अलावा वित्त विभाग के प्रतिनिधि शामिल हैं।
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सरकार ने सबसे पहले इन कॉलेजों से फीस का प्रस्ताव मांगा है। प्रस्ताव आने के बाद सरकार अपनी ओर से कार्रवाई करेगी। कॉलेजों से उनका पक्ष जानने के बाद ही फीस का निर्धारण किया जाएगा।
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने व्यावसायिक शिक्षा की तर्ज पर फीस निर्धारित करने का फैसला किया है। यानी जिस तरह सरकार बीएड व पॉलीटेक्निक के निजी कॉलेजों की फीस तय करती है, उसी तरह निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों की फीस भी तय होगी।
पढ़ाएंगे ही नहीं छात्रों का 2013 में कोर्ट से मिल गया था स्टे प्रदेश सरकार ने इससे पहले वर्ष 2013 में निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस निर्धारण की कोशिश की थी लेकिन तब उसने कॉलेजों का पक्ष नहीं जाना था।
इसलिए कॉलेज के संचालक न्यायालय की शरण में चले गए। कोर्ट ने सरकार के कदम पर स्टे लगा दिया। इस कारण सरकार उस समय फीस पर अंकुश नहीं लगा सकी थी। इस बार सरकार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।