संविधान आदेश (अनुसूचित जाति) 1950 के तहत कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति से धर्म परिवर्तन कर सिख या बौद्ध धर्म स्वीकार करता है तो उसे आरक्षण का लाभ मिलेगा। हालांकि, वह इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाता है तो अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं रह जाता है।
बर्खास्तगी से लेकर एफआईआर तक
सूत्र बताते हैं कि कमेटी ने मंडल स्तर पर कई स्तरों पर जांच आख्या की पड़ताल की है। इसमें अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निरस्त होने के बाद संबंधित उस पद के अयोग्य हो जाती हैं। ऐसे में बर्खास्तगी के साथ रिकवरी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने की रिपोर्ट भी दर्ज कराई जा सकती है।
एसजीपीजीआई सहित अन्य संस्थानों की जांच की मांग
अब वर्ष 2012 के बाद नर्सिंग की सभी भर्तियों की जांच की मांग की गई है। तर्क दिया गया कि आरोपी की बहनें व रिश्तेदार अस्पतालों में गलत प्रमाण पत्रों पर नौकरी हासिल कर चुके हैं। पत्र में आरोप लगाया है कि कई लोगों ने अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र लगाकर केजीएमयू, लोहिया संस्थान मेें नर्सिंग ग्रेड पर नौकरी हासिल की है। कुछ के उदाहरण भी दिए गए हैं।
संस्थानों ने यह कहा
एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने बताया कि जाति प्रमाण पत्र गलत होने की जानकारी मिली है। विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। सेवा नियमावली के तहत गलत जाति प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी हासिल करना जुर्म है। जल्द प्रकरण का निस्तारण कर दिया जाएगा। केजीएमयू के मीडिया प्रभारी डॉ. सुधीर सिंह का कहना है कि अभी तक शासन की ओर से कोई जवाब नहीं मांगा गया है। पत्रावलियों की जांच कराने संबंधित आदेश आएगा तो कुलपति कार्यालय उस पर विधिक कार्रवाई करेगा। वहीं लोहिया संस्थान के मीडिया प्रभारी डॉ. श्रीकेश सिंह ने बताया कि संस्थान में अभी तक नियुक्ति में गड़बड़ी संबंधी मामला सामने नहीं आया है। मुख्यमंत्री कार्यालय का आदेश होगा तो जांच कराई जाएगी।