शासन के एक अफसर सचिवालय के एक कर्मी को नेता बनाने में लगे हुए हैं। पीसीएस से प्रमोट होकर आईएएस बने ये अफसर सियासत में काफी दिलचस्पी लेते हैं।
वे सरकार की नरम-गरम होती सेहत पर पारखी नजर रखने के साथ सचिवालय कर्मियों की सियासत में पूरा दखल रखना चाहते हैं।
युवा नेता ने अफसर की यह खूबी पहचान ली। साहब को गुरु कहने लगा और साहब इस नौजवान नेता को बुला-बुला कर तरक्की के मंत्र बताने लगे।
वह बड़े इत्मीनान से बताते हैं कि किस-किस तरह की मांगें करनी चाहिए। ज्ञापन किस-किसको देना होगा। इतना ही नहीं, ज्ञापन की भाषा भी समझा देते हैं। नेता भी खुश। फॉर्मूला हिट जा रहा है।
फाइलें तेजी से चल रही हैं। साथी कर्मचारी नेता भी खुश। पर, अफसर और युवा नेता के बीच प्रगाढ़ होते रिश्ते कई दूसरे नेताओं को हजम नहीं हो पा रहे हैं। युवा नेता से उन्हें खतरे दिखाई देने लगे हैं।