पीडब्ल्यूडी की बड़ी मैम इसी महीने रिटायर होने वाली हैं। महकमे की सबसे बड़ी कुर्सी खाली हो रही है। इसलिए छोटे साहब सक्रिय हो गए हैं। स्वाभाविक दावेदार भी हैं। पर महकमे के वजीर को वे फूटी आंख नहीं सुहाते।
कई बार भरी सभा में वे छोटे साहब को हड़का चुके हैं। बरसों से जिस कुर्सी का इंतजार था वह किसी और की न हो जाए, यह सोचकर ही छोटे साहब की दिल की धड़कनें तेज हो गई हैं।
छोटे साहब अब इस तिकड़म में जुटे हैं कि किसी तरह वजीर से सेटिंग हो जाए। खास लोगों ने उन्हें सलाह दी कि भई, परिक्रमा में जुट जाओ।
शायद मेहनत रंग ले आए। छोटे साहब इसमें जुट तो गए हैं लेकिन उन्हें इसमें कितनी कामयाबी मिलती है, यह तो महीने के आखिर तक ही पता चलेगा।
हो सकता है वजीर पसीज जाएं और पूरी हो जाए उनकी मनोकामना।