उद्योग विभाग के मंत्री आजकल अपने विभागीय प्रमुख सचिव के हटाए जाने से खासे बेचैन हैं। तय नहीं कर पा रहे हैं क्या करें? आखिरकार उद्यमियों के कार्यक्रम में मंच, माइक, माला और सुनने वाले मिले तो वे अपनी पीड़ा रोक नहीं सके।
बड़े सलीके से अपने सूबे के मुखिया के सामने अपनी पीड़ा का इजहार किया। उन्होंने प्रमुख सचिव की तारीफ में कसीदे काढ़ते हुए यहां तक कह डाला कि उनका हटना विभाग और खास तौर पर मेरे लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
हालांकि उन्होंने अपने मन को यह कहकर तसल्ली दी कि प्रमुख सचिव राजधानी जैसे मंडल के मुखिया बनाए गए हैं। अब देखना यह है कि ‘सरकार’ मंत्रीजी के दुर्भाग्य पर तरस खाते हैं या नहीं।